महाकालेश्वर मन्दिर : जैसे ही शाम ढलती है, हरिसिद्धि मन्दिर का वातावरण अचानक बदल जाता है। सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों दीपकों की रोशनी से पूरा परिसर ऐसा चमक उठता है मानो श्रद्धा स्वयं प्रकाश बनकर उतर आई हो। इन दीपों की कतारें जब एक साथ प्रज्वलित होती हैं, तो वहां मौजूद श्रद्धालु कुछ क्षणों के लिए मंत्रमुग्ध होकर उसी दृश्य में खो जाते हैं। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर यहां पहुंचने वाले भक्त सिर्फ दर्शन करने नहीं आते, बल्कि उस आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करने आते हैं, जिसकी चर्चा वर्षों से होती रही है।
महाकाल नगरी में स्थित
धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित यह मंदिर महाकालेश्वर मन्दिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है और माना जाता है कि यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। इसी कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इतिहास से जुड़ी मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि महान राजा सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी मां हरसिद्धि ही थीं। इसलिए इस मंदिर का महत्व धार्मिक ही नहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत खास माना जाता है।
दीपमाला की अद्भुत रोशनी
हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थापित लगभग 51 फीट ऊंची दीपमालाएं हैं। इन विशाल दीप स्तंभों पर एक साथ हजार से अधिक दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। जैसे ही संध्या आरती का समय होता है, पूरा मंदिर परिसर सुनहरी रोशनी से भर उठता है और वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दीप प्रज्वलित कर सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान दीपमालाओं के दर्शन के लिए








