Makar Sankranti 2026: स्नान, दान और सूर्य उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि लाने का पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

मकर संक्रांति 2026 में 14 जनवरी को मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त में स्नान, दान और सूर्य पूजा करने से पुण्य मिलता है। यह पर्व धर्म, प्रकृति और फसल से जुड़ा हुआ है।

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Makar Sankranti 2026:मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र और खास त्योहार माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और ध्यान करने से विशेष पुण्य फल मिलता है। साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शुभ समय में किए गए कार्य कई गुना फल देते हैं।

पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त यानी पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा। इसी समय से महा पुण्य काल भी प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, इस दिन सुबह 9 बजकर 3 मिनट से लेकर 10 बजकर 48 मिनट के बीच गंगा स्नान को बहुत शुभ माना गया है। जो लोग गंगा या किसी पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

मकर संक्रांति की सरल पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और सूर्य देव की पूजा करें। सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में लाल फूल, चावल और थोड़ा सा सिंदूर मिलाना शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य देव के मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप करें।

पूजा के बाद दान का विशेष महत्व होता है। तिल, गुड़, चावल, कंबल, ऊनी कपड़े और जरूरतमंदों को भोजन दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। घर में तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसम के अनुसार बने व्यंजन भगवान को अर्पित करें। साथ ही, भगवद गीता और सूर्य पूजा से जुड़े धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी लाभदायक माना जाता है।

मकर संक्रांति के अलग-अलग नाम

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल कहा जाता है, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात में उत्तरायण और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी पर्व या मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हालांकि नाम अलग हैं, लेकिन भाव और आस्था एक ही है।

मकर संक्रांति का धार्मिक और सामाजिक महत्व

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं। इस कारण यह दिन सूर्य उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थीं और भगवान विष्णु ने राक्षसों का नाश कर धर्म की स्थापना की थी।

यह पर्व खेती-किसानी से भी जुड़ा है। फसल पकने की खुशी में यह त्योहार खासकर ग्रामीण भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। दान, सेवा और आपसी मेल-जोल का यह पर्व जीवन में सकारात्मकता और नई ऊर्जा का संचार करता है।

डिस्क्लेमर:यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। News1 India इसकी पूर्ण सत्यता या व्यक्तिगत फल की गारंटी नहीं देता। किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

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