Mauni Amavasya Deepdaan:माघ महीने में पड़ने वाली मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि रविवार, 18 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन स्नान, दान, साधना, मौन व्रत, पितृ तर्पण के साथ-साथ दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की काली और अंधेरी रात में किया गया दीपदान जीवन के कष्टों को दूर करता है और पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि माघ अमावस्या पर दीपदान करने से तीन पीढ़ियों का उद्धार होता है। जिस प्रकार दीपक की रोशनी अंधकार को समाप्त करती है, उसी तरह यह दीपदान जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर सकारात्मकता का संचार करता है। इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल अक्षय माना गया है, यानी इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
कहां करें दीपदान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ अमावस्या की रात कुछ विशेष स्थानों पर दीपदान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
पीपल और तुलसी के पास: माघ अमावस्या की रात तुलसी के पौधे के पास और पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
नदी तट या सरोवर: अमावस्या तिथि पर सूर्योदय के बाद गंगा, यमुना, सरयू, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के तट पर दीपदान करना श्रेष्ठ माना गया है। यदि नदी या सरोवर पास न हो, तो किसी मंदिर के प्रांगण में भी दीपक जलाया जा सकता है।
घर के मुख्य द्वार पर: अमावस्या की रात घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी का वास होता है, जिससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
पितरों के लिए दक्षिण दिशा में दीपक: माघ अमावस्या पितरों के लिए विशेष तिथि मानी जाती है। इस दिन तर्पण करने के बाद सूर्यास्त के पश्चात घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक अवश्य जलाएं, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है।
इस प्रकार, मौनी अमावस्या पर श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया दीपदान जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। news1india इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है। यहां पर दी गई किसी भी प्रकार की जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य ले लें।


