Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन अप्रैल 2026 के प्रदोष व्रत को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है कि यह व्रत 14 अप्रैल को रखा जाए या 15 अप्रैल को।
कब है सही प्रदोष व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो सूर्यास्त के समय पड़ती है। अप्रैल 2026 में त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 अप्रैल को होगी और इसका समापन 15 अप्रैल को होगा।
ऐसे में उदय तिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए 14 अप्रैल को व्रत रखना अधिक शुभ और उचित माना जा रहा है।
क्या होता है प्रदोष काल?
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का लगभग डेढ़ घंटे का समय होता है। इस समय भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस काल में की गई पूजा और उपासना का कई गुना फल मिलता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
•सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें
•पूरे दिन फलाहार या उपवास रखें
•शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें
•भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फल अर्पित करें
•“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
•शिव आरती और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें
व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह व्रत विशेष रूप से आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक माना जाता है। साथ ही भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।
