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Sawan 2026: सावन में दही और कढ़ी खाने से क्यों किया जाता है मना? क्या जानिए धार्मिक मान्यता

Sawan 2026: भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस पूरे महीने श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और सात्विक भोजन का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसी वजह से दही, कढ़ी, रायता और अन्य खट्टे दुग्ध उत्पादों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद और स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारण भी बताए गए हैं।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

धर्मशास्त्रों के अनुसार सावन का महीना तप, संयम और सात्विक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भारी, तामसिक और अधिक खट्टे भोजन से दूरी बनाने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान शिव को सात्विक और शुद्ध आहार प्रिय है, इसलिए श्रद्धालु भी हल्का एवं सुपाच्य भोजन ग्रहण करते हैं। इसी कारण दही और उससे बने व्यंजनों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद में क्या है वजह?

आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। दही का स्वभाव भारी और कफ बढ़ाने वाला माना जाता है। अधिक मात्रा में दही या कढ़ी खाने से सर्दी-जुकाम, गले की परेशानी, कफ और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर रात के समय दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है।

वैज्ञानिक कारण भी हैं अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। इस दौरान पशुओं के चारे और दूध की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में दूध और उससे बने उत्पादों के सेवन में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण और पाचन संबंधी दिक्कतों से बचा जा सके।

सावन में क्या खाना बेहतर माना जाता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सावन में ताजे फल, हरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरई, परवल और सीमित मात्रा में घी का सेवन लाभदायक माना जाता है। हल्का और सात्विक भोजन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ पाचन तंत्र पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं डालता। यदि किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय कारणों से दही या दुग्ध उत्पाद लेने की सलाह दी गई है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही आहार अपनाना चाहिए।

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