Sawan 2026:आज से शुरू होगा श्रावण मास, चार सोमवारी व्रत और शिव आराधना का मिलेगा विशेष पुण्य

श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। भगवान शिव की आराधना, चार सोमवारी व्रत, नाग पंचमी, मधुश्रावणी, झूलन और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व इस पावन माह को विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करेंगे।

Shravan Maas 2026

Sawan 2026:भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाला श्रावण मास आज , गुरुवार से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ प्रारंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में इस पूरे माह को भगवान आशुतोष की उपासना, व्रत, जप और अभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

सोमवार के व्रत का विशेष महत्व

आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व है। जो श्रद्धालु पूरे महीने नियमित पूजा नहीं कर पाते, उन्हें कम से कम सोमवार के दिन भगवान शिव का व्रत रखकर पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए। इस दिन प्रातः स्नान कर शिवालय में जाकर षोडशोपचार विधि से भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यदि गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर विधिपूर्वक स्नान करके भी पूजा की जा सकती है।

दूध, दही और पंचामृत से करें अभिषेक

आचार्य ने बताया कि पूरे श्रावण मास में भगवान शिव का दूध, दही, घी, मधु, गुड़, पंचामृत, भांग एवं अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक करने का विशेष महत्व है। ऐसी श्रद्धापूर्ण पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही माता पार्वती, जिन्हें लक्ष्मी स्वरूपा माना गया है, उनकी कृपा भी भक्तों पर बनी रहती है। श्रावण मास में शिव महापुराण का श्रवण और शिव माहात्म्य का पाठ भी अत्यंत शुभ माना गया है।

इस बार बन रहा है चार सोमवारी व्रत का योग

इस वर्ष श्रावण मास में चार सोमवारी व्रत पड़ेंगे। पहला सोमवारी व्रत 3 अगस्त को अमृत योग एवं शिववास के विशेष संयोग में रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। दूसरा सोमवारी व्रत 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त को संक्रांति एवं अमृत योग के साथ तथा चौथा एवं अंतिम सोमवारी व्रत 24 अगस्त को रखा जाएगा। श्रद्धालु इन दिनों विशेष पूजा और व्रत कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

श्रावण में कई प्रमुख पर्व भी मनाए जाएंगे

श्रावण मास के दौरान कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व भी मनाए जाएंगे। 3 अगस्त से नवविवाहित महिलाओं का विशेष पर्व मधुश्रावणी प्रारंभ होगा, जिसका समापन 15 अगस्त को होगा। इसी अवधि में स्वर्ण गौरी व्रत, नाग पंचमी, मोना पंचमी और मां मनसा देवी की पूजा भी संपन्न होगी। वहीं 23 अगस्त से झूलन उत्सव की शुरुआत होगी। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। इसी के साथ श्रावण मास का समापन भी होगा।

श्रद्धा और भक्ति का पावन अवसर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में की गई भगवान शिव की आराधना, व्रत, दान, जप और अभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है। यह महीना केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि ही नहीं, बल्कि लोककल्याण, आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की कामना के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु पूरे माह शिव भक्ति में लीन होकर भगवान आशुतोष की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

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