Chanu Gold Medal: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार अंदाज में अपने अभियान की शुरुआत की है। देश की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर दबाव के बीच भी वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। मीराबाई की इस उपलब्धि ने भारतीय दल का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है और देशभर में उनके प्रदर्शन की जमकर तारीफ हो रही है।
स्नैच में बनाया रिकॉर्ड
मीराबाई चानू ने प्रतियोगिता के दौरान स्नैच में 85 किलोग्राम वजन उठाकर नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। हालांकि, मुकाबले के बाद उन्होंने साफ किया कि उनका लक्ष्य शुरुआत से रिकॉर्ड बनाना नहीं था। वह केवल अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन करना चाहती थीं। मीराबाई के मुताबिक, उनका मुख्य उद्देश्य भारत के लिए पदक जीतना और यह देखना था कि वह अपनी तैयारी के दम पर कितना अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। रिकॉर्ड बनना उनके लिए एक शानदार अतिरिक्त उपलब्धि रही।
दबाव को संभालना जरूरी
मीडिया से बातचीत में मीराबाई ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स हर खिलाड़ी के लिए बेहद खास प्रतियोगिता होती है। हर एथलीट चाहता है कि वह इस बड़े मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करे और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे। उन्होंने माना कि ऐसे बड़े टूर्नामेंट में दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन असली खिलाड़ी वही होता है जो उस दबाव को सही तरीके से संभालकर अपनी रणनीति पर कायम रहे। मीराबाई ने भी मुकाबले के दौरान इसी सोच के साथ अपना पूरा ध्यान प्रदर्शन पर रखा।
कोच के भरोसे पर उठाया वजन
रिकॉर्ड को लेकर मीराबाई ने बताया कि उन्होंने पहले से 85 किलोग्राम वजन उठाने का कोई खास लक्ष्य तय नहीं किया था। उनका ध्यान रिकॉर्ड से ज्यादा अपनी कमियों को समझने और प्रदर्शन का आकलन करने पर था, क्योंकि भविष्य में 48 किलोग्राम वर्ग कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि उनके कोच ने भरोसा जताया था कि वह यह वजन आसानी से उठा सकती हैं। मीराबाई ने कोच की बात पर विश्वास किया और चुनौती स्वीकार कर ली। जब उन्होंने सफलतापूर्वक वजन उठाया और रिकॉर्ड बना, तो यह पल उनके लिए बेहद यादगार बन गया।
संघर्ष याद कर हुईं भावुक
स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू अपने संघर्षों को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। वर्षों तक कड़ी मेहनत, लगातार ट्रेनिंग, चोटों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बज रहा था, तब उन्हें अपने संघर्ष और त्याग के सभी पल याद आ गए। उनकी आंखों से निकले आंसू उस खुशी और गर्व को बयां कर रहे थे, जिसे हर खिलाड़ी अपने करियर में महसूस करना चाहता है।
अब एशियाई खेलों पर नजर
मीराबाई चानू की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। उनकी शानदार सफलता आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से पहले भारतीय दल के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। मीराबाई ने भी संकेत दिया है कि अब उनका ध्यान आगे की चुनौतियों पर है। वह अपनी कमियों को सुधारकर एशियाई खेलों में और बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड और नया रिकॉर्ड बनाने के बाद भारतीय फैंस को उम्मीद है कि मीराबाई आने वाले टूर्नामेंट में भी देश के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी।
