Commonwealth Games : दशकों का इंतजार खत्म, किसने ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज को हरा जूडो में दिलाया ऐतिहासिक दूसरा गोल्ड

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज़ को हराकर पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण जीता। अस्मिता डे के बाद यह भारत का दूसरा जूडो गोल्ड और ऐतिहासिक डबल गोल्ड साबित हुआ।

Game Changer: भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो से ऐतिहासिक खबर सामने आई। अस्मिता डे के गोल्ड जीतने के कुछ समय बाद ही हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज़ को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही भारत ने एक ही दिन जूडो में दो गोल्ड जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में डबल गोल्ड हासिल किया।

शानदार मुकाबला

फाइनल मुकाबला काफी कड़ा और रोमांचक रहा। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज़ को इस मुकाबले का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन हर्ष सिंह ने पूरे मैच में धैर्य और शानदार तकनीक का प्रदर्शन किया। मुकाबले के अंतिम क्षणों में उन्होंने निर्णायक बढ़त बनाई और जीत अपने नाम कर ली। इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि भारतीय जूडो अब विश्व स्तर पर बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

23 वर्षीय हर्ष सिंह का यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और उन्होंने अपने डेब्यू में ही इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बन गए। इससे पहले अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत का खाता खोला था। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है और आने वाले वर्षों के लिए उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं।

देशभर में खुशी

हर्ष सिंह और अस्मिता डे की ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों से लेकर पूर्व खिलाड़ियों तक सभी ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि को भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए दोनों खिलाड़ियों की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत भारत में जूडो को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम करेगी और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर प्रेरित करेगी।

बढ़ीं नई उम्मीदें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत होता जा रहा है। जूडो में मिले दो स्वर्ण पदकों ने पदक तालिका में भारत की स्थिति को भी मजबूत किया है। हर्ष सिंह की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय जूडो के लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत का परिणाम मानी जा रही है। अब देश को उम्मीद है कि भारतीय जूडो खिलाड़ी आने वाले एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी इसी तरह का शानदार प्रदर्शन करेंगे।

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