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Bhojpur Encounter: भोजपुर एनकाउंटर पर उठे सवाल, माँ बोली, समर्पण के बाद उसे गोली क्यों मारी गई? गांव में गुस्सा, सड़क जाम

Bhojpur Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि भरत ने पुलिस के सामने हथियार छोड़ दिया था और सरेंडर भी कर दिया था। इसके बावजूद उस पर गोलियां चलाना समझ से परे है। घटना के बाद से पूरे इलाके में नाराजगी का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर युवक ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता था।

पुलिस ने क्या बताया?

भोजपुर पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी नाम का युवक हाथ में पिस्टल लेकर हवाई फायरिंग कर रहा है और लोगों को डरा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस का कहना है कि युवक को कई बार सरेंडर करने के लिए कहा गया। इसी दौरान हालात बिगड़ गए और मुठभेड़ जैसी स्थिति बन गई। इसके बाद गोली चलने की घटना हुई, जिसमें भरत घायल हो गया।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी का कहना है कि उनका बेटा कोई अपराधी नहीं था। उनके अनुसार, भरत के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और न ही कोई चार्जशीट थी। पिता का आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने पिस्टल फेंक दी थी और आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। उन्होंने कहा कि पहले उनके बेटे को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया और बाद में उस पर गोली चला दी गई।

मां ने भी उठाए सवाल

भरत भूषण तिवारी की मां ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। रोते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा समाज की भलाई के लिए काम करता था। उनके मुताबिक, बेटे ने सरेंडर कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने कई गोलियां चला दीं। मां का कहना है कि भरत का स्वभाव थोड़ा तेज जरूर था, लेकिन वह लोगों की मदद करता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उसके पास लाइसेंसी हथियार नहीं था और उसे कुछ लोगों ने गुमराह किया था।

गांव में गुस्सा, सड़क जाम

भरत की मौत के बाद गांव और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया हो, तो उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए, न कि गोली मारी जानी चाहिए। प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन प्रभावित रहा।

लोगों के मन में उठ रहे हैं कई सवाल

इस घटना के बाद कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब लोग जानना चाहते हैं। क्या भरत तिवारी वास्तव में मानसिक रूप से अस्वस्थ था? अगर उसने सरेंडर कर दिया था, तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उस पर पहले कोई आपराधिक मामला नहीं था, फिर उसे इतना बड़ा खतरा क्यों माना गया? क्या पुलिस के पास गोली चलाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

इलाज के दौरान हुई मौत

गोली लगने के बाद भरत भूषण तिवारी को पहले शाहपुर अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल भेजा गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया। पीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद से इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।

जांच की मांग तेज

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार बढ़ रही है। परिवार, ग्रामीण और कई सामाजिक संगठन चाहते हैं कि घटना की हर पहलू से जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुसार थी या नहीं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह मामला बिहार की राजनीति और सामाजिक चर्चाओं में बना रह सकता है।

Disclaimer: यह लेख विभिन्न पक्षों के दावों और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। News1india किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही माना जाना चाहिए।

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