Bihar Political Change: बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हैं। भाजपा और जदयू नई रणनीति पर विचार कर रही हैं। मुख्यमंत्री के नए चेहरे, उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है।
पटना से दिल्ली तक बढ़ी हलचल
बिहार की राजनीति में इन दिनों अचानक हलचल तेज हो गई है। पटना से लेकर दिल्ली तक सत्ता परिवर्तन की चर्चा जोरों पर है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अभी तक न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही जनता दल (यूनाइटेड) इस मुद्दे पर किसी तरह की जल्दबाजी दिखा रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह जरूर माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दोनों दल पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ेगी रफ्तार
सरकारी सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया 16 मार्च तक चलेगी। इसके बाद नए सांसदों का शपथ ग्रहण 9 अप्रैल के बाद होना है। यानी अभी लगभग एक महीने का समय बाकी है और इसी दौरान बिहार की राजनीति में नई रणनीति तैयार की जा सकती है।
बताया जा रहा है कि सबसे पहले भाजपा और जदयू अपने-अपने विधायक दल की बैठक करेंगी। इन बैठकों में विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद एनडीए विधायक दल का नेता तय होगा। फिर मुख्यमंत्री इस्तीफा देकर नए नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे।
मुख्यमंत्री चेहरे पर सस्पेंस
भाजपा की राजनीतिक शैली को देखते हुए यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पार्टी मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई बड़ा सियासी सरप्राइज दे सकती है। अंदरखाने यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी किसी अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के नेता को मुख्यमंत्री बनाकर नया सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर सकती है।
यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पटना दौरे के दौरान कुछ ईबीसी विधायकों से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही इस तरह की चर्चाओं को और बल मिला है।
उपमुख्यमंत्री पद पर चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक सत्ता के नए फॉर्मूले में भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रख सकती है। वहीं जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है।
इन संभावित नामों में निशांत कुमार और सम्राट चौधरी का नाम सबसे ज्यादा सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते हुए अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आगे बढ़ा सकते हैं।
वहीं विजय चौधरी को जदयू में सबसे भरोसेमंद और अनुभवी नेता माना जाता है। उनकी प्रशासनिक समझ और संतुलित राजनीतिक शैली उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
स्पीकर और गृह विभाग पर खींचतान
हालांकि सत्ता के इस नए समीकरण में एक और मुद्दा सामने आ गया है। विधानसभा स्पीकर और गृह विभाग को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा चल रही है।
जदयू चाहती है कि ये दोनों जिम्मेदारियां उसके पास रहें। दूसरी ओर भाजपा भी इन्हें छोड़ने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है। इसलिए इस मामले में अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
रामनवमी तक बन सकती है नई सरकार
सूत्रों का कहना है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है तो रामनवमी यानी 26 मार्च तक बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है। नई कैबिनेट में करीब 32 मंत्री शामिल हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इसमें भाजपा और जदयू के 14-14 मंत्री होंगे। वहीं एलजेपी (आर) और अन्य सहयोगी दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने से पहले सत्ता का पूरा समीकरण बदल सकता है और पटना की राजनीति का असली खेल अब शुरू होता नजर आ रहा है।



