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Delhi Metro पर प्रदूषण नियम उल्लंघन का जुर्माना: MCD ने लगाया ₹3.8 लाख का दंड

दिल्ली मेट्रो पर प्रदूषण नियम उल्लंघन का जुर्माना: MCD ने लगाया ₹3.8 लाख का दंडDelhi Metro Rail Corporation : दिल्ली नगर निगम (MCD) ने DMRC (दिल्ली मेट्रो) पर प्रदूषण‑नियमों का उल्लंघन करने के लिए 28 चालान जारी किए और  ₹3.8 लाख का जुर्माना लगाया है। 28 चालानों में से 24 चालान राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार और अन्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के उल्लंघन के लिए जारी किए गए थे। शुक्रवार को दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। MCD ने बताया कि मिहरौली‑बदरपुर (MB) रोड पर मेट्रो निर्माण स्थलों की जांच के दौरान DMRC के 28 साइटों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया। इन उल्लंघनों में शामिल है धूल नियंत्रण के अपर्याप्त उपाय, निर्माण सामग्री को ढकने में कमी, निर्माण स्थलों पर उचित बैरिकेटिंग न होना और ऑन-साइट हाउसकीपिंग न होना। South Zone ने सबसे अधिक चालान जारी किए, हालांकि Central Zone में भी इसी तरह के उल्लंघन पाए गए।

लेकिन DMRC ने MCD के आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उनका जिम्मा सिर्फ 6.58 Km का वह हिस्सा है और उनके निर्माण स्थलों पर पहले से ही आवश्यक प्रदूषण‑नियंत्रक प्रोटोकॉल लागू हैं। DMRC ने यह भी दावा किया है कि वे नियमित रूप से पानी छिड़काव कर रहे हैं, निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरे को C&D प्लांट भेज रहे हैं, और ‘एंटी-स्मॉग गन’ का उपयोग भी कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर उचित बैरिकेड्स न होने के कारण धूल वाहनों की लेन तक फैल गई। उन्होंने आगे कहा कि सड़क किनारे का मलबा, चाहे उसे किसी ने भी डाला हो, धूल के स्तर को बढ़ाता है और उसे तुरंत साफ़ करना ज़रूरी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियमों के तहत जारी किए गए चार चालान लावारिस पड़े मलबे से संबंधित थे। MCD ने कहा कि मलबे ने पैदल चलने वालों के लिए जगह घेर दी और धूल का भार बढ़ा दिया। नगर निकाय ने DMRC से तत्काल सफाई सुनिश्चित करने को कहा है।

Pollution: इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन गंभीरता से देखा जा रहा है और निर्माण एजेंसियों पर ज़िम्मेदारी तय की जा रही है। यह प्रवर्तन ऐसे समय में किया जा रहा है जब दिल्ली वायु गुणवत्ता में गिरावट के एक और दौर में प्रवेश कर रही है। शहर भर में GRAP प्रतिबंध लागू हैं, और एजेंसियों को सर्दियों के दौरान कड़े मानदंडों का पालन करना आवश्यक है। निर्माण कार्य से होने वाली धूल PM2.5 के स्तर में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक बनी हुई है, जिसके कारण सभी सार्वजनिक और निजी परियोजना स्थलों की कड़ी निगरानी की आवश्यकता है।

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