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China President Car: शी जिनपिंग की कार को काले कवर में क्यों लाया गया, जाने सामने आई क्या वजह

China President Car: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से एक दिन पहले उनकी आधिकारिक कार की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। दिल्ली की सड़कों पर कार को बड़े काले कवर से ढककर ले जाते हुए देखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर राष्ट्रपति की कार को इस तरह क्यों छिपाया गया।

हालांकि, कार पर कवर होना अपने आप में किसी खास सुरक्षा खतरे का संकेत नहीं है। विदेशी दौरों पर राष्ट्राध्यक्षों के लिए इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक गाड़ियों को कई बार अलग से संबंधित देश में पहुंचाया जाता है। ट्रांसपोर्ट के दौरान कवर का इस्तेमाल गाड़ी को धूल, मौसम और रास्ते में होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए किया जा सकता है।

जिनपिंग के बैठने से पहले हटा दिया गया कवर

शी जिनपिंग जब 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे तो उनके काफिले में शामिल आधिकारिक कार सामान्य स्थिति में नजर आई। यानी काले कवर का इस्तेमाल कार को चलाते समय नहीं, बल्कि उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के दौरान किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा पहली बार नहीं है। इससे पहले मलेशिया दौरे के दौरान भी जिनपिंग की आधिकारिक कार को कवर करके ले जाते हुए तस्वीरें सामने आई थीं।

Hongqi N701 है जिनपिंग की खास कार

शी जिनपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक लिमोजिन Hongqi N701 है। इसे चीन की कंपनी FAW के Hongqi ब्रांड ने तैयार किया है। Hongqi का चीन के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से पुराना संबंध रहा है और यह ब्रांड लंबे समय से राजकीय कार्यक्रमों में इस्तेमाल होने वाली कारों के लिए जाना जाता है।

N701 को राष्ट्रपति स्तर के इस्तेमाल के लिए तैयार की गई विशेष और बेहद सुरक्षित सरकारी कार माना जाता है। विदेश यात्राओं में भी चीन अपने शीर्ष नेता के लिए घरेलू कंपनी की कार को प्राथमिकता देता है।

ताज होटल में ठहरने की भी चर्चा

शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह नई दिल्ली के ताज होटल में ठहरेंगे और उनके साथ चीन से करीब 400 लोगों का प्रतिनिधिमंडल भारत आया है।

सात साल बाद भारत दौरे पर शी जिनपिंग

शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनका यह दौरा 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में आए तनाव के बीच दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों के संदर्भ में भी इस यात्रा पर नजर है।

 

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