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Satya Niketan Victims: किसी ने CA बनने का सपना देखा, किसी ने छुट्टियां बिताकर दिल्ली लौटते ही गंवाई जान

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने की घटना ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। हादसे में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई। इनमें कुछ छात्र बड़े शहर में पढ़ाई करके अपना भविष्य बनाने आए थे, तो कुछ छुट्टियां बिताकर कुछ घंटे पहले ही दिल्ली लौटे थे। किसी ने सीए बनने का सपना देखा था तो कोई बीकॉम और बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। दो दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाव दल ने सात शव निकाले और 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

अर्पित की कहानी

हादसे में जान गंवाने वालों में 18 वर्षीय अर्पित भी था। वह मध्य प्रदेश के देवास का रहने वाला था और रक्षाबंधन की छुट्टी परिवार के साथ बिताने के बाद हादसे वाले दिन ही दिल्ली लौटा था। अर्पित के पिता भूपेंद्र कैब चलाते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार ने उसके साथ छुट्टियां खुशी से बिताई थीं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बेटे को खोने की खबर मिली। अर्पित बड़े शहर में पढ़ना चाहता था और चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहा था। वह बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था और करीब डेढ़ साल से इसी पीजी में रह रहा था।

मां ने पहचाना

अर्पित के दोस्तों ने हादसे की जानकारी मिलने के बाद रातभर उसे मलबे में तलाशा। बाद में अस्पताल से उसकी मौत की पुष्टि हुई। सोमवार सुबह करीब साढ़े छह बजे परिवार अस्पताल पहुंचा, लेकिन शव की हालत ऐसी थी कि पहचान करना बेहद मुश्किल था। आखिरकार अर्पित की मां ने उसके शरीर पर मौजूद जन्म के निशान से बेटे की पहचान की। परिवार के लिए यह पल बेहद दर्दनाक था। जिस बेटे को कुछ घंटे पहले खुश होकर दिल्ली भेजा था, उसी की पहचान अब शव के रूप में करनी पड़ी।

आंखें कर दीं दान

अर्पित के पिता ने बताया कि अगर उन्हें पहले पता होता कि पीजी की हालत इतनी खराब है तो वह बेटे को वहां कभी रहने नहीं देते। पोस्टमार्टम के बाद परिवार ने अर्पित की आंखें दान करने का फैसला किया। परिवार का कहना था कि उनका बेटा अब उनके साथ नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से किसी दूसरे इंसान की जिंदगी में रोशनी आ सकती है। इस फैसले ने गहरे दुख के बीच इंसानियत की एक मिसाल भी पेश की।

दूसरे परिवार उजड़े

अर्पित की तरह युवराज सोनी भी सीए बनने की तैयारी कर रहा था। वह मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था और कुछ समय पहले ही नॉर्थ कैंपस से इस पीजी में रहने आया था। उसके दोस्त आर्यन ने बताया कि युवराज अभी नया-नया वहां रहने लगा था। हादसे में 19 वर्षीय अक्षत सिंह यादव की भी मौत हुई। वह मध्य प्रदेश के कटनी का रहने वाला था और रक्षाबंधन की छुट्टी के बाद दिल्ली लौटा था। अक्षत पीजीडीएवी कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष में पढ़ रहा था। हादसे में एक मजदूर और एक अन्य व्यक्ति की भी जान गई, जबकि कम से कम दो घायलों की हालत गंभीर बताई गई और उनका एम्स में इलाज चल रहा है। इस हादसे ने राजधानी में पीजी इमारतों की सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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