पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी में आईएएस अनुराग यादव की सीईसी से बहस, पद से हटाए गए, कार्रवाई की चर्चा तेज

आईएएस अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी के दौरान सीईसी से बहस के बाद हटा दिया गया। जानकारी न दे पाने पर विवाद बढ़ा। अब उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

IAS Anurag Yadav Row with CEC :आईएएस अधिकारी अनुराग यादव इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। लेकिन एक वर्चुअल बैठक के दौरान उनकी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से बहस हो गई, जिसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

चुनाव आयोग की बैठक

दरअसल, चुनाव आयोग ने चुनाव तैयारियों को लेकर एक अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्य सचिव और कई अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कूच बिहार दक्षिण क्षेत्र के पर्यवेक्षक अनुराग यादव से उनके इलाके के पोलिंग बूथ की संख्या पूछी गई।

जानकारी न दे पाने पर बढ़ा मामला

बताया जा रहा है कि अनुराग यादव तुरंत सही जानकारी नहीं दे पाए। काफी देर बाद उन्होंने जवाब देने की कोशिश की, लेकिन तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त नाराज हो गए और उन्होंने सख्त लहजे में बात की।

आईएएस अधिकारी का जवाब

इस पर अनुराग यादव ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनसे इस तरह से बात नहीं की जा सकती और उन्होंने इस सेवा में 25 साल दिए हैं। यह जवाब सुनने के बाद मामला और बढ़ गया।

पर्यवेक्षक पद से हटाए गए

इसके बाद चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पर्यवेक्षक पद से हटा दिया और वापस लौटने का निर्देश दिया। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई भी हो सकती है।

कार्रवाई की चर्चा तेज

कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग ने इस मामले में मुख्य सचिव को पत्र भी भेजा है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर कार्रवाई होती है, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।

अनुराग यादव का प्रोफाइल

अनुराग यादव 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और इस समय प्रमुख सचिव स्तर पर कार्यरत हैं। हाल ही में उन्हें समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले वह सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में भी काम कर चुके हैं।

पहले भी हुआ ऐसा मामला

यह पहली बार नहीं है जब किसी आईएएस अधिकारी को चुनाव ड्यूटी से हटाया गया हो। इससे पहले 2011 बैच के आईएएस अभिषेक सिंह को 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान वापस भेजा गया था। उस समय उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हुआ था।

बढ़ सकती है सख्ती

इस घटना के बाद यह साफ है कि चुनाव आयोग अपने काम को लेकर काफी सख्त है। चुनाव जैसे अहम काम में किसी भी तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा रही है।

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