Lightning Tragedy : मंगलवार को झारखंड के कई जिलों में हुई तेज बारिश और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचा दी। गिरिडीह, दुमका और लातेहार जिलों में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्य शुरू कर दिया है। लगातार हो रही बारिश के बीच लोगों से खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने की अपील की गई है।
गिरिडीह में सबसे ज्यादा मौतें
सबसे अधिक नुकसान गिरिडीह जिले में हुआ, जहां नौ लोगों की मौत दर्ज की गई। खोरीमहुआ के एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार के अनुसार, उनके उप-मंडल के तीन थाना क्षेत्रों में सात लोगों की जान गई और तीन लोग घायल हुए। देवरी थाना क्षेत्र में पांच लोगों की मौत हुई, जहां कुछ युवक खेल खत्म होने के बाद एक जगह बैठे थे। अचानक बिजली गिरने से चार युवाओं समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। गावां और नौडीहा थाना क्षेत्रों में भी दो लोगों की जान गई, जबकि बगोदर क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति की मौत हुई।
मां के शव से लिपटकर रोते रहे बच्चे
सबसे भावुक घटना गावां थाना क्षेत्र के पटना चौक के पास सामने आई। 35 वर्षीय पूनम देवी सुबह से खेत में धान की रोपाई कर रही थीं। दोपहर में वह अन्य महिलाओं के साथ बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन कर रही थीं, तभी तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे मां के शव से लिपटकर रोते रहे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। बताया गया कि पूनम देवी के पति दिल्ली में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
दुमका और लातेहार में भी तबाही
दुमका जिले के रामगढ़ प्रखंड में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चे सहित चार लोग घायल हो गए। वहीं लातेहार जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दो लोगों की जान चली गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है। प्रशासन ने सभी प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया है।
मौसम विभाग की अपील
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खेतों, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गरज-चमक के दौरान सुरक्षित भवन में शरण लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। प्रशासन ने भी लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और सतर्क रहने की अपील की है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।
