Municipal Elections 2026: महाराष्ट्र में इस बार के नगर निगम चुनाव ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी। अधिकतर नगर निगमों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। मुंबई में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन के साथ सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाती दिखी।
MIM lने सबका ध्यान खींचा
लेकिन इस चुनाव में एक और पार्टी ने सबका ध्यान खींचा – असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM। पार्टी ने मालेगांव, मुंबई, संभाजीनगर, धुले और नांदेड़ जैसे शहरों में अच्छे नतीजे दिखाए। पूरे राज्य में कुल 74 एमआईएम उम्मीदवार जीतकर सामने आए।
मुंबई में पांच एमआईएम उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं। संभाजीनगर में 24 उम्मीदवार विजयी हुए। अमरावती में 6 और मालेगांव में 20 उम्मीदवार जीतकर पार्टी ने वहां सबसे बड़ी पार्टी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया। नांदेड़ में एमआईएम दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है, जहां 14 उम्मीदवार जीत चुके हैं। धुले में 8 और जालना में 2 उम्मीदवार जीतकर पार्टी की पकड़ मजबूत हुई है।
मुस्लिम बहुल इलाकों में एमआईएम का दबदबा
विशेष रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों में एमआईएम का प्रदर्शन बढ़ा है। पार्टी ने स्थानीय समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मुद्दों पर जोर दिया। यही रणनीति उन्हें छोटे शहरों में भी सफल बनाती दिखी। भले ही भाजपा और शिवसेना की ताकत बहुत है, एमआईएम ने छोटे लेकिन सटीक चुनाव अभियान से असर दिखाया। उम्मीदवारों ने सीधे लोगों तक पहुंच बनाई और उनकी समस्याओं को उठाया।
मीम ने तोड़ा राजनीतिक मिथ
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि एमआईएम का यह प्रदर्शन भविष्य में और भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पार्टी छोटे शहरों और नगर निगमों में अपने प्रभाव को धीरे-धीरे बढ़ा रही है। इससे यह साफ होता है कि महाराष्ट्र में अब सिर्फ बड़े दल या पुरानी पहचान पर भरोसा नहीं चलता, बल्कि स्थानीय मुद्दों और सही तरीके से काम करने पर ही जीत मिलती है।
नगर निगम चुनाव 2026 में एमआईएम ने कई जगह अपनी पकड़ मजबूत बनाई। मालेगांव और संभाजीनगर में उनका प्रदर्शन खास रहा। यह बताता है कि छोटे और नए दल भी सही योजना से बड़ा असर डाल सकते हैं।
डिस्क्लेमर : जानकारी सिर्फ सामान्य उद्देश्य के लिए है। जो विभिन्न स्रोतों से ली गई है। वास्तविक परिणाम और आंकड़े आधिकारिक चुनाव आयोग वेबसाइट से जांचे, न्यूज1 इंडिया इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता।


