Cyber Sleeper Cell Exposed:जांच एजेंसियों का दावा है कि डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी और फर्जी लोन रिकवरी जैसे बड़े साइबर अपराधों के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। हाल के मामलों में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया है कि वे पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसी आधार पर साइबर स्लीपर सेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दिल्ली में पकड़ा गया मेवाती गैंग
दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में एक जांच के दौरान इस नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने मेवाती गैंग से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ और मोबाइल फोन की जांच में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। आरोपी के मोबाइल में पाकिस्तानी नंबरों से लगातार संपर्क के सबूत मिले, जो साइबर अपराध में सक्रिय बताए जा रहे हैं। जांच में पता चला कि आरोपी एक संगठित साइबर सिंडिकेट का हिस्सा था। वह ई-सिम का इस्तेमाल कर रहा था और अपने निजी फोन से पाकिस्तानी व्हाट्सऐप नंबरों पर रोज बात करता था। पुलिस को चैट के स्क्रीनशॉट, पेमेंट ऐप की जानकारी और क्रिप्टो लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं।
कैसे काम करता था यह मॉड्यूल
आरोपी ने कबूल किया कि वह बाइनेंस प्लेटफॉर्म के जरिए USDT क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-फरोख्त में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। वह भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स की UPI आईडी पाकिस्तानी संदिग्धों को देता था। जैसे ही उन UPI पर पैसा आता, ट्रेडर्स पाकिस्तानी बाइनेंस आईडी पर USDT भेज देते थे। इस पूरे लेनदेन पर आरोपी करीब 5 प्रतिशत कमीशन लेता था।
जांच में आया भयानक सच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान से संचालित फर्जी लोन रिकवरी कॉल सेंटर भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन कॉल सेंटरों से लोगों को डराकर पैसे वसूले जाते थे। पीड़ितों से पेमेंट के स्क्रीनशॉट मंगवाकर सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। यह पैसा आगे क्रिप्टो के जरिए विदेश भेज दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि साइबर स्लीपर सेल की भर्ती बेहद संगठित तरीके से की जा रही है। गांव और छोटे इलाकों के लोगों के नाम पर म्यूल अकाउंट खुलवाए जाते हैं। फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड लिए जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट और अन्य ठगी में इस्तेमाल होने वाली रकम को मिनटों में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान के कुछ APT हैकर ग्रुप भारत के रक्षा और संवेदनशील संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। खतरनाक फाइलों और लिंक के जरिए डेटा चोरी की कोशिशें की जा रही हैं। यह गतिविधियां अब केवल ठगी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से क्या की अपील
सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल से सावधान रहें। साइबर अपराध की शिकायत तुरंत Cybercrime.gov.in पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज करें। समय पर की गई शिकायत बड़े नुकसान से बचा सकती है।
