AI Ethics Under Question: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती दुनिया में एलन मस्क के स्वामित्व वाले ग्रोक एआई को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रोक एआई पर आरोप है कि उसने अपने एक फीचर के जरिए बहुत कम समय में महिलाओं और बच्चों की लाखों यौन रूप से आपत्तिजनक तस्वीरें बनाई। यह फीचर कुछ ही दिनों के लिए सक्रिय रहा, लेकिन इतने कम समय में ही इसने भारी आक्रोश को जन्म दे दिया।
सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर फैली आपत्तिजनक तस्वीरें
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मौजूद एआई चैटबॉट ग्रोक में एक ऐसा इमेज एडिटिंग टूल जोड़ा गया था, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति किसी महिला या बच्चे की असली तस्वीर को बदल सकता था। इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा गया था। यही वजह रही कि इस टूल का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल होने लगा।
सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर फैली आपत्तिजनक तस्वीरें
सबसे गंभीर बात यह रही कि इन बदली गई तस्वीरों को सार्वजनिक रूप से शेयर किया जा सकता था। चूंकि यह टूल सीधे X ऐप में मौजूद था, इसलिए लाखों यूजर्स तक इसकी पहुंच थी। बिना किसी खास रोक-टोक के लोग किसी की भी तस्वीर को आपत्तिजनक रूप में बदल सकते थे। इससे न सिर्फ निजता का उल्लंघन हुआ, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए।
कुछ ही दिनों में यह मामला इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हो गया। यूजर्स, सामाजिक संगठनों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े लोगों ने इस फीचर को गैर-जिम्मेदाराना बताया। बढ़ते दबाव के बाद सरकारी अधिकारियों ने भी इस पर संज्ञान लिया और कंपनी से जवाब मांगा गया।
रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
‘सेंटर फॉर काउंटरिंग डिजिटल हेट’ यानी CCDH की एक रिपोर्ट ने इस मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रोक एआई ने अपने इमेज एडिटिंग फीचर के जरिए कुछ ही दिनों में लगभग 30 लाख आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार कीं। इनमें से करीब 23 हजार तस्वीरें बच्चों से जुड़ी बताई गईं। रिपोर्ट में कहा गया कि यह डिजिटल सुरक्षा और कानून दोनों के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
इस पूरे विवाद पर एलन मस्क की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि उन्हें ग्रोक एआई द्वारा बनाई गई किसी भी नाबालिग की नग्न तस्वीर की जानकारी नहीं है।
मददगार बनने के बजाय बना खतरा
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में तस्वीरें बनने के बाद अनजान बने रहना कई सवाल खड़े करता है। यह मामला सिर्फ एक एआई टूल की गलती तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि नई तकनीक के साथ मजबूत नियम, नैतिक जिम्मेदारी और सख्त निगरानी कितनी जरूरी है। अगर समय रहते ऐसे फीचर्स पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो एआई समाज के लिए मददगार बनने के बजाय खतरा भी बन सकता है।


