DeepSeek crash stock market: DeepSeek R1 AI मॉडल के आ जाने से, भारतीय शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर की कीमतें पिछले 2 से 3 कारोबारी सत्रों में 50% तक गिर चुकी हैं। यह गिरावट भारतीय कंपनियों के लिए एक चिंता का विषय बन चुकी है। खासतौर पर, अनंत राज, नेटवेब टेक्नोलॉजीज और ज़ेन टेक्नोलॉजीज जैसे प्रमुख नामों के शेयरों में भारी नुकसान हुआ है। इस गिरावट का कारण DeepSeek द्वारा पेश किया गया AI मॉडल है, जिसे लेकर कई वैश्विक कंपनियां प्रभावित हुई हैं, जिसमें NVIDIA शामिल है।
DeepSeek नामक चीनी एआई स्टार्ट-अप द्वारा लॉन्च किए गए R1 मॉडल का असर न केवल अमेरिकी बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी दिख रहा है। इसने खासकर उन कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं जो टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर के क्षेत्र में कार्यरत हैं। भारत में कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में पिछले 2-3 कारोबारी सत्रों के दौरान 50% तक की गिरावट दर्ज की गई है। इनमें अनंत राज, नेटवेब टेक्नोलॉजीज, और जेन टेक्नोलॉजीज जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिनकी कीमतों में काफी कमी आई है।
1. DeepSeek R1 मॉडल का असर
- चीनी एआई स्टार्ट-अप DeepSeek ने R1 नामक AI मॉडल लॉन्च किया है।
- इसका दावा है कि यह ChatGPT का एक सस्ता और बेहतर विकल्प है, जिसमें कम चिप्स की आवश्यकता है।
- यह मॉडल पूरी तरह से फ्री है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हलचल मच गई है।
- NVIDIA जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में 20% तक की गिरावट आई है, जिससे भारतीय कंपनियों पर भी असर पड़ा है।
2. प्रमुख भारतीय कंपनियों में गिरावट
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अनंत राज:
- मंगलवार को 20% तक की गिरावट, शेयर 534.45 रुपये पर बंद हुए।
- 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 45% तक की गिरावट।
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नेटवेब टेक्नोलॉजीज:
- मंगलवार को 10% गिरकर 1,460.35 रुपये पर बंद हुए।
- 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 52% से अधिक की गिरावट।
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Zen Technologies:
- मंगलवार को 14% गिरकर 1,495.10 रुपये पर आ गए।
- 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 43% तक की गिरावट।
3. NVIDIA के शेयरों की गिरावट का असर
- NVIDIA के शेयरों में दो दिन के दौरान 20% की गिरावट आई है।
- इसका असर भारत में डेटा सेंटर और टेक कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है।
- NVIDIA का मार्केट कैप 600 अरब डॉलर तक गिर चुका है।
4. भविष्य में स्थिति
- इस गिरावट का मुख्य कारण DeepSeek का तेजी से बढ़ता प्रभाव और एआई क्षेत्र में नई प्रतिस्पर्धा का उदय है।
- भारतीय कंपनियों को इस प्रभाव को समझते हुए अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा।






