Wireless Electricity: बिना तार और बिना प्लग घरों तक पहुंचेगी बिजली, फिनलैंड ने दिखाया आने वाले कल का रास्ता

फिनलैंड में वायरलेस बिजली तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। हवा के जरिए बिजली भेजने के सफल प्रयोग हो चुके हैं। अभी चुनौतियां हैं, लेकिन भविष्य में बिना तार बिजली आम लोगों तक पहुंच सकती है।

Wireless Electricity Future Technology

Wireless Electricity Future:अब तक हम सभी यही मानते आए हैं कि बिजली का मतलब तार, प्लग और सॉकेट होता है। मोबाइल चार्ज करना हो या टीवी चलाना, हर जगह तारों का जाल नजर आता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। भविष्य में बिजली भी मोबाइल नेटवर्क की तरह पूरी तरह वायरलेस हो सकती है। यानी बिना तार, बिना प्लग और बिना सॉकेट के आपके घर और डिवाइस तक बिजली पहुंचेगी। यह बात भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन फिनलैंड ने इसे हकीकत में बदलकर दिखा दिया है।

वायरलेस बिजली की दिशा में फिनलैंड की बड़ी छलांग

फिनलैंड इस समय वायरलेस पावर ट्रांसफर तकनीक में दुनिया के सबसे आगे माना जा रहा है। यहां के वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि हवा के जरिए बिजली भेजी जाए। आल्टो यूनिवर्सिटी, हेलसिंकी यूनिवर्सिटी और ओउलू यूनिवर्सिटी में चल रही रिसर्च ने 2025–2026 के दौरान कई अहम कामयाबियां हासिल की हैं।

इन शोधों में लेजर बीम, रेडियो फ्रीक्वेंसी, हाई-फ्रीक्वेंसी मैग्नेटिक फील्ड्स और यहां तक कि अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स से बनने वाले “एकॉस्टिक वायर” जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तरीकों से बिजली को बिना किसी तार के एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा है।

कैसे काम करती है वायरलेस पावर तकनीक

वायरलेस बिजली का आधार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड पर टिका होता है। इसमें एक ट्रांसमीटर हवा में ऊर्जा भेजता है, जबकि दूसरा उपकरण यानी रिसीवर उस ऊर्जा को पकड़कर उसे इस्तेमाल लायक बिजली में बदल देता है। फिनलैंड में खासतौर पर मैग्नेटिक इंडक्शन और रेजोनेंट कपलिंग तकनीक पर ज्यादा काम हो रहा है।

इस प्रक्रिया में ट्रांसमीटर और रिसीवर को एक ही फ्रीक्वेंसी पर सेट किया जाता है। इससे बिजली का ट्रांसफर ज्यादा बेहतर और स्थिर हो जाता है। आल्टो यूनिवर्सिटी की रिसर्च ने यह भी दिखाया है कि अब डिवाइस को बिल्कुल सही जगह रखने की जरूरत नहीं है। चलते-फिरते और काम करते हुए भी चार्जिंग संभव हो रही है।

लैब से बाहर निकलकर असली दुनिया में प्रयोग

फिनलैंड ने इस तकनीक को सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखा। हाल के डेमो में वेयरहाउस रोबोट्स, सेंसर और छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हवा से बिजली लेते हुए दिखाए गए। आल्टो यूनिवर्सिटी और Solteq Robotics के परीक्षणों में रोबोट बिना रुके काम करते हुए खुद चार्ज होते नजर आए।

कुछ प्रयोगों में 80 प्रतिशत से ज्यादा बिजली ट्रांसफर की क्षमता दर्ज की गई। इसी बड़ी सफलता के कारण टाइम मैगजीन ने 2025 में इन खोजों को “Best Inventions” की सूची में शामिल किया।

फिर अभी घरों में वायरलेस बिजली क्यों नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी कम दूरी और कम पावर के लिए ज्यादा कारगर है। फिलहाल 1 किलोवाट से 20 किलोवाट तक की बिजली ही आसानी से भेजी जा सकती है। दूरी बढ़ने पर बिजली की ताकत कम हो जाती है। इसके अलावा इंसानी शरीर पर असर और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार रिसर्च चल रही है।

यही वजह है कि घरों, गाड़ियों और पूरे शहरों तक वायरलेस बिजली पहुंचने में अभी कुछ साल और लग सकते हैं। लेकिन फिनलैंड की यह पहल साफ संकेत देती है कि भविष्य में बिजली इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है।

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