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CJI ने किसको कहा, संविधान नहीं मान सकते तो भारत छोड़िए, संविधान और नागरिकों की निजता पर दिया कड़ा संदेश

Supreme Court on WhatsApp Privacy: व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई कंपनी भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकती, तो उसे यहां काम करने का अधिकार नहीं है। अदालत किसी भी हाल में देश के नागरिकों की निजता से समझौता नहीं होने देगी। CJI ने यह भी दोहराया कि प्राइवेसी कोई छोटी बात नहीं, बल्कि हर नागरिक का मूल अधिकार है।

व्हाट्सऐप की पॉलिसी पर सवाल

CJI ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को भ्रामक और बहुत चालाकी से तैयार किया गया दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि सोचिए, एक गरीब बुज़ुर्ग महिला, सड़क किनारे सामान बेचने वाला व्यक्ति या सिर्फ तमिल बोलने वाली महिला इस पॉलिसी को कैसे समझेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार के किसी ग्रामीण इलाके में रहने वाला व्यक्ति इतनी जटिल भाषा में लिखी पॉलिसी को आखिर कैसे समझ पाएगा।

CJI का कहना था कि कंपनियां यहां सेवा देने के लिए हैं, न कि चुपचाप डेटा इकट्ठा कर उसे दूसरों से साझा करने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी अदालत को भी इन पॉलिसीज़ को समझने में परेशानी होती है, तो आम लोग कैसे सही सहमति दे पाएंगे। अदालत यूज़र्स की प्राइवेसी और “जानकारी के साथ सहमति” यानी इनफॉर्म्ड कंसेंट पर किसी भी तरह की ढील नहीं देगी।

डेटा और विज्ञापन पर चिंता

सुनवाई के दौरान CJI ने एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर अगर व्हाट्सऐप पर कुछ दवाओं के नाम भेजते हैं, तो कुछ ही मिनटों में उन्हीं दवाओं से जुड़े विज्ञापन दिखने लगते हैं। इससे यह शक गहराता है कि यूज़र्स के डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन के लिए किया जा रहा है।

जस्टिस बागची की टिप्पणी

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन कानून सिर्फ प्राइवेसी की बात करता है, लेकिन यहां असली चिंता यूज़र्स के व्यवहार और आदतों से जुड़ी है। लोगों के डिजिटल निशान का इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, ऐसी बड़ी टेक कंपनियों पर दुनिया भर में कड़ी और नई तरह की निगरानी जरूरी है।

व्हाट्सऐप का जवाब और कानूनी पृष्ठभूमि

व्हाट्सऐप की ओर से पेश वकील ने कहा कि कंपनी ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को दूसरे देशों के नियमों के अनुसार अपडेट किया है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया और मामले को तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया।

गौरतलब है कि नवंबर 2024 में CCI ने व्हाट्सऐप पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। आरोप था कि कंपनी ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया और यूज़र्स को नई पॉलिसी मानने के लिए मजबूर किया। जनवरी 2025 में NCLAT ने “डॉमिनेंस के दुरुपयोग” वाला हिस्सा हटाया, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा। इसी फैसले को चुनौती देने के लिए मेटा सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

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