Agra Bhole Baba Chole Bhature Misleading Video: उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया पर एक भ्रामक वीडियो के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। आगरा पुलिस ने एक पत्रकार और कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ थाना छत्ता में मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला ‘भोले बाबा छोले-भटूरे’ नामक दुकान से जुड़ा है, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और व्हाट्सएप पर गलत तरीके से एक मुस्लिम व्यक्ति (आरिफ) की दुकान बताकर प्रचारित किया गया था। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दुकान का असली मालिक विजय शुक्ला है और वायरल वीडियो महीनों पुराना है, जिसे जानबूझकर धार्मिक विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से वर्तमान संदर्भ में साझा किया गया था।
#BREAKING -There is a shop named called “Bhole Baba Chole Bhature.” located in Agra.
But when the payment QR code is scanned,the name that appears is
Mohammad Arif . pic.twitter.com/Ey9QUDoiSv— Risav Bajpayi (@jurnorisav) January 13, 2026
घटना का विवरण और पुलिस जांच
Agra पुलिस के अनुसार, उप निरीक्षक योगेंद्र सिंह की शिकायत पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में दावा किया गया था कि हिंदू नाम से चल रही इस दुकान का असली संचालक आरिफ है, जिससे जनता के बीच भ्रम और आक्रोश पैदा करने की कोशिश की गई।
जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो तथ्यों ने दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। जांच में सामने आया कि:
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दुकान का स्वामित्व: दुकान बेलनगंज निवासी विजय शुक्ला की है।
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कर्मचारी की भूमिका: आरिफ पिछले 15 वर्षों से विजय शुक्ला की दुकान पर एक वफादार कर्मचारी के रूप में काम कर रहा है।
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पुराना विवाद: यह वीडियो हालिया नहीं बल्कि कई महीने पुराना है। उस समय कालिंदी विहार निवासी सचिन सिंह का छोले-भटूरे के भुगतान को लेकर विवाद हुआ था, जिसे अब सांप्रदायिक रंग देकर दोबारा वायरल किया गया।
नामजद आरोपी और कानूनी कार्रवाई
Agra पुलिस ने इस मामले में डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर अंकुर अग्रवाल (पत्रकार), शिवम दीक्षित, सचिन गुप्ता, गोल्डी श्रीवास्तव और सचिन सिंह समेत 10 लोगों को नामजद किया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है जो सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और अफवाह फैलाने से संबंधित हैं।
पुलिस की चेतावनी
Agra पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया की निगरानी लगातार की जा रही है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि बिना पुष्टि किए किसी भी भ्रामक सामग्री को साझा न करें। पुलिस का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने और शांति व्यवस्था को भंग करने वाले किसी भी प्रयास के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, इस मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी है।






