Vishnu Shankar Jain Akhilesh Yadav defamation case: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील विष्णु शंकर जैन ने संभल हिंसा से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अखिलेश यादव के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया है। जैन का आरोप है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक सामग्री साझा की, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। दिलचस्प बात यह है कि इस केस में हर्जाने के तौर पर केवल 1 रुपये की प्रतीकात्मक राशि मांगी गई है। वकील का तर्क है कि सपा प्रमुख ने मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया और हिंसा के लिए उत्तरदायी ठहराया, जबकि वह केवल अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
विवाद की जड़: क्या था वह सोशल मीडिया पोस्ट?
यह पूरा मामला 24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। हिंसा के बाद, अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (X) पर Vishnu Shankar Jain की एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस पोस्ट में संकेत दिया गया था कि “जिन्होंने बवाल शुरू किया और जो फसाद की असली वजह बने”, उनकी पहचान कब की जाएगी?
सपा की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि सर्वे के दौरान Vishnu Shankar Jain ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए, जिससे वहां मौजूद भीड़ उग्र हो गई। Vishnu Shankar Jain ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
वकील विष्णु शंकर जैन का पक्ष
विष्णु शंकर जैन ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में दलील दी कि:
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वे संभल के शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर मामले में हिंदू पक्ष के वकील के तौर पर कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे थे।
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अखिलेश यादव ने बिना किसी सबूत के उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
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कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद अखिलेश यादव ने न तो माफी मांगी और न ही विवादित पोस्ट हटाया।
1 रुपये का हर्जाना क्यों?
कानूनी गलियारों में 1 रुपये के हर्जाने की मांग को ‘प्रतीकात्मक जीत’ माना जाता है। विष्णु शंकर जैन का कहना है कि उनका मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपनी गरिमा की रक्षा करना और यह साबित करना है कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी के सम्मान से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
संभल हिंसा की पृष्ठभूमि
याद दिला दें कि संभल कोर्ट के आदेश पर मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था, जिस दौरान पथराव और गोलीबारी की घटनाएं हुई थीं। इस हिंसा में कई लोगों की जान गई थी। हाल ही में कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर भी केस दर्ज करने का आदेश दिया है, जिसके बाद यूपी की सियासत में उबाल आ गया है।




