Political Signal: विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब बीजेपी के मजबूत माने जाने वाले लोधी वोट बैंक पर फोकस कर रहे हैं। 16 अगस्त को वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती के मौके पर अखिलेश ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर 16 अगस्त को सरकारी अवकाश घोषित किया जाएगा। इस घोषणा को लोधी समाज को राजनीतिक सम्मान देने और उसे सपा के पीडीए समीकरण से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
लोधी वोट का असर
उत्तर प्रदेश में लोधी समाज की आबादी करीब 4 से 5 प्रतिशत मानी जाती है। संख्या के लिहाज से यह बहुत बड़ा जातीय समूह नहीं है, लेकिन रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड और मध्य यूपी के कई इलाकों में इसकी मजबूत मौजूदगी है। राजनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, प्रदेश की 65 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर लोधी मतदाता चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। यही वजह है कि 2027 से पहले सपा इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
सपा के पास लोधी चेहरे
लोधी समाज को साधने की कोशिश के बीच सपा के पास विधानसभा और लोकसभा में इस समुदाय के कई प्रमुख चेहरे भी मौजूद हैं। पार्टी के विधायक राहुल लोधी, चंद्र प्रकाश लोधी और रेखा वर्मा अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं लोकसभा में अजेन्द्र सिंह लोधी हमीरपुर से सपा के सांसद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को हराया था। सपा अब इन नेताओं के जरिए लोधी समाज में अपना संगठनात्मक आधार और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
इन इलाकों पर नजर
लोधी समाज का प्रभाव एटा, कासगंज, बदायूं, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, शाहजहांपुर, पीलीभीत, हरदोई और उन्नाव समेत कई जिलों में माना जाता है। इसके अलावा बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर जैसे इलाकों में भी यह वोट चुनावी गणित को प्रभावित करता है। खासकर बुंदेलखंड में अजेन्द्र सिंह लोधी की 2024 की जीत को सपा अपने लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देख सकती है।
बीजेपी के गढ़ पर नजर
लोधी समाज का बीजेपी के साथ लंबे समय से मजबूत राजनीतिक जुड़ाव रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दौर में यह रिश्ता और मजबूत हुआ था। ऐसे में सपा की मौजूदा रणनीति सिर्फ नए वोट बैंक को जोड़ने की कोशिश नहीं, बल्कि बीजेपी के पारंपरिक सामाजिक आधार में सेंध लगाने की कवायद भी मानी जा रही है। अखिलेश यादव लोधी समाज को पीडीए के साथ जोड़कर यादव, अन्य पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं का व्यापक गठजोड़ तैयार करना चाहते हैं।
टिकटों से खुलेगा पत्ता
सपा की इस रणनीति का सबसे बड़ा असर 2027 के टिकट वितरण में देखने को मिल सकता है। जिन सीटों पर लोधी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, वहां पार्टी मजबूत लोधी चेहरों को मैदान में उतार सकती है। मकसद सिर्फ लोधी वोट हासिल करना नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व को पीडीए के दूसरे सामाजिक समूहों के साथ जोड़कर जीत का समीकरण तैयार करना है। अवंतीबाई लोधी की जयंती पर छुट्टी और उनकी भव्य प्रतिमा लगाने का ऐलान करके अखिलेश ने राजनीतिक संदेश दे दिया है। अब देखना होगा कि यह संदेश बूथ स्तर तक कितना असर डालता है और 2027 में बीजेपी के पारंपरिक समीकरण को कितनी चुनौती मिलती है।
