Akhilesh Yadav slam RSS on CPC delegation: जनवरी 2026 में भारत और चीन के रिश्तों में आई हालिया गर्माहट के बीच एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पहुंचने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। 13 जनवरी 2026 को दिल्ली में RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले और चीनी नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को अखिलेश ने बीजेपी की “दोगली नीति” करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग स्वदेशी का नारा देते थे, वे आज “परदेशी” के स्वागत में बिछ गए हैं। सपा प्रमुख का यह हमला बीजेपी के पुराने स्टैंड और वर्तमान कूटनीतिक सक्रियता के बीच के अंतर्विरोधों को उजागर करता है।
स्वदेशी से परदेशी तक का सफर: Akhilesh Yadav का तीखा हमला
Akhilesh Yadav ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बीजेपी और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि बीजेपी और उनके संगी-साथी स्वदेशी का जाप करते-करते अब पूरी तरह परदेशी हो गए हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जो पार्टी कल तक चीनी आयात का कड़ा विरोध कर रही थी, वह आज चीनी नेताओं का साक्षात् स्वागत कैसे कर रही है? उन्होंने व्यंग्य किया कि शायद बीजेपी के “वैचारिक उस्ताद” पड़ोसी देश से एकदलीय व्यवस्था (Single Party System) की मास्टर क्लास ले रहे हैं।
कार्यकर्ताओं की ‘धूल झोंकने’ का आरोप
अखिलेश यादव ने इस मुलाकात की टाइमिंग और पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आज बात आमने-सामने की मुलाक़ात तक पहुंच गई है, तो इसका स्पष्ट मतलब है कि इसकी तैयारी पिछले कई सालों से चल रही थी। उन्होंने पूछा:
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क्या चीनी सामान के बहिष्कार का ड्रामा केवल समर्थकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए था?
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उन कार्यकर्ताओं का क्या होगा जो घर-घर जाकर चीनी सामान न खरीदने की अपील करते थे?
सपा चीफ Akhilesh Yadav ने लिखा कि आज वे समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे होंगे और व्हाट्सएप पर मैसेज कर रहे होंगे कि “बीजेपी किसी की सगी नहीं है।”
‘रंगे सियार’ की कहानी का संदर्भ
Akhilesh Yadav ने अपने प्रहार को और कड़ा करते हुए बीजेपी समर्थकों की तुलना ‘रंगे सियार’ की कहानी से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बारिश होने पर सियार का रंग उतर जाता है और उसकी असलियत सामने आ जाती है, उसी तरह बीजेपी का “राष्ट्रवाद और स्वदेशी” का मुखौटा भी उतर चुका है। उन्होंने कहा कि अब इन समर्थकों को अपने वैचारिक पूर्वजों की तरह ‘भूमिगत’ होने की नौबत आ गई है।
मुलाकात की अहमियत
गौरतलब है कि सुन हयान (Vice Minister, CPC) के नेतृत्व में आए इस चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पहले बीजेपी मुख्यालय में पार्टी महासचिव अरुण सिंह से मुलाकात की और अगले दिन आरएसएस कार्यालय ‘केशव कुंज’ पहुंचे। हालांकि आरएसएस ने इसे केवल एक शिष्टाचार भेंट (Courtesy Call) बताया है, लेकिन विपक्षी दलों—विशेषकर कांग्रेस और सपा—ने इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। यह राजनीतिक घमासान ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-चीन सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें फिर से शुरू हुई हैं।
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