SP AIMIM Alliance: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की हार ने समाजवादी पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब बिहार जैसी गलती यूपी में नहीं दोहराना चाहते, जहाँ वोटों के बंटवारे ने खेल बिगाड़ दिया था। मंगलवार को लखनऊ में हुई सपा सांसदों की अहम बैठक में भविष्य के गठबंधन को लेकर बड़े संकेत मिले। सबसे चौंकाने वाला मोड़ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) को लेकर आया है। जिस दल को सपा अब तक ‘बी-टीम’ या ‘वोट कटवा’ कहती थी, अब उसके लिए नरमी दिखाई दे रही है, ताकि 2027 में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का किला फतह किया जा सके।
सांसद रमाशंकर राजभर का बयान: बदली सपा की हवा
बैठक के बाद सपा सांसद रमाशंकर राजभर का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जब उनसे ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सीधा इनकार (SP AIMIM Alliance) करने के बजाय कहा, “भाजपा को हराने के लिए जो भी दल साथ आना चाहते हैं, उनका स्वागत है।” हालांकि उन्होंने नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट है कि सपा अब किसी भी कीमत पर मुस्लिम वोटों का बिखराव नहीं चाहती। राजभर का यह लचीला रुख इस बात की तस्दीक करता है कि पार्टी अब कट्टरता छोड़ ‘व्यावहारिक राजनीति’ (Pragmatic Politics) की राह पर है।
बिहार की हार: सपा के लिए एक चेतावनी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सीमांचल की सीटों पर ओवैसी के प्रभाव ने महागठबंधन को सत्ता से दूर कर दिया था। अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि यूपी में भी वेस्ट यूपी और पूर्वांचल की कई सीटों पर AIMIM खेल बिगाड़ने की क्षमता रखती है। अगर ओवैसी सपा के साथ आते हैं, तो मुस्लिम वोटों का एकतरफा ध्रुवीकरण भाजपा की राह मुश्किल कर सकता है।
क्या ओवैसी और अखिलेश का तालमेल संभव है?
अखिलेश यादव अब तक छोटे (SP AIMIM Alliance) दलों को साथ जोड़कर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजभर के जरिए पिछड़ों और ओवैसी के जरिए अल्पसंख्यकों को जोड़ने का यह फॉर्मूला कागजों पर तो मजबूत दिखता है, लेकिन असल चुनौती सीटों के बंटवारे और वैचारिक मतभेदों को सुलझाने की होगी। ओवैसी लंबे समय से सपा पर मुस्लिम नेतृत्व को दबाने का आरोप लगाते रहे हैं। अब गेंद ओवैसी के पाले में है—क्या वे भाजपा को रोकने के लिए अखिलेश का हाथ थामेंगे?
सपा की यह नई ‘अलर्टनेस’ बताती है कि 2027 की लड़ाई सिर्फ नारों की नहीं, बल्कि सटीक गणित की होने वाली है।


