Allahabad High Court: धर्म परिवर्तन करने वाली दो बहनों को मिली आजादी, लाखों का मुआवजा भी हुआ तय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाने वाली दो बालिग बहनों को कथित अवैध हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पिता और यूपी सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये मुआवजा देने तथा सभी दस्तावेज सात दिन में लौटाने का निर्देश दिया।

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाने वाली दो बालिग बहनों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोनों युवतियों को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जीवन जीने की स्वतंत्रता दी है। साथ ही बालिग बेटियों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए उनके पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने दोनों बहनों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि

कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि बालिग नागरिक की व्यक्तिगत स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 25 के तहत धर्म और अंतःकरण की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।

कोर्ट के मुताबिक, कोई माता-पिता केवल धार्मिक या व्यक्तिगत फैसले से असहमति के आधार पर अपनी बालिग संतान को उसकी इच्छा के विरुद्ध घर में नहीं रख सकता। कोर्ट ने पुलिस और राज्य सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों की रक्षा के बजाय कार्रवाई में उदासीनता बरती गई।

2020 और 2021 में अपनाया था इस्लाम

मामला आगरा के सदर बाजार क्षेत्र से जुड़ा है। अनिल कुमार भाटिया की बेटियों अंशु भाटिया उर्फ अमीना और दिया भाटिया उर्फ जोया ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने क्रमशः 2020 और 2021 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था।

दोनों ने आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन के बाद पिता ने उन्हें घर में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा और उनके शैक्षणिक दस्तावेज, पासपोर्ट, बैंक पासबुक तथा पहचान पत्र अपने पास रख लिए। उन्होंने धर्म परिवर्तन वापस लेने के लिए दबाव बनाए जाने की बात भी कही।

तुरंत रिहाई का आदेश

कोर्ट ने दोनों महिलाओं को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से कहीं भी रह सकती हैं और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जा सकती हैं।

वहीं, राज्य की ओर से इसे कथित संगठित साजिश का हिस्सा होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन कोर्ट ने केवल आशंका के आधार पर दोनों बालिग महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित करने को उचित नहीं माना।

आठ सप्ताह में देना होगा 25 लाख मुआवजा

अदालत ने पिता और राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर दोनों बहनों को कुल 25 लाख रुपये, यानी 12.5-12.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। राज्य सरकार बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिम्मेदार अधिकारियों और पिता से राशि की वसूली कर सकती है।

कोर्ट ने पिता को दोनों बेटियों के मूल दस्तावेज भी सात दिनों के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है। पुलिस को उनके शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप न करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा देने के निर्देश दिए गए हैं।

 

Exit mobile version