Auraiya Double Murder: सपा के पूर्व MLC समेत 10 दोषी, वकील और सरकारी शिक्षिका बहन की दिनदहाड़े हुई थी हत्या

औरैया में वकील मंजुल चौबे और उनकी सरकारी शिक्षिका बहन सुधा की हत्या के करीब छह साल बाद कोर्ट ने सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी माना।

Auraiya Double Murder Case

उत्तर प्रदेश के औरैया में करीब छह साल पुराने चर्चित डबल मर्डर केस में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। MP-MLA कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। मामला वकील मंजुल चौबे और उनकी सरकारी शिक्षिका बहन सुधा की दिनदहाड़े हत्या से जुड़ा है। कोर्ट के फैसले के बाद अब दोषियों की सजा पर सुनवाई होनी है। सुरक्षा को देखते हुए अदालत परिसर में भी पुलिस बल बढ़ाया गया है।

छह साल पुराना मामला

यह घटना 15 जनवरी 2020 की है। उस दिन मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया था। मुकदमे की सुनवाई करीब छह साल तक चली। इस दौरान 900 से ज्यादा तारीखें पड़ीं और दोनों पक्षों की ओर से 72 गवाह पेश किए गए। अब कोर्ट ने 10 आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना है। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मामला जुबेनाइल कोर्ट भेजा गया था।

पुरानी दोस्ती में दरार

कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच कभी बेहद करीबी दोस्ती थी। मंजुल को कमलेश पाठक का करीबी और अंगरक्षक तक बताया जाता था। दोनों के रिश्तों में 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान खटास शुरू हुई। इसके बाद राजनीतिक मतभेद बढ़ते गए और दोनों अलग-अलग राजनीतिक खेमों के करीब पहुंच गए। समय के साथ पुरानी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बढ़ता चला गया।

जमीन को लेकर विवाद

मामले में पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन का विवाद भी सामने आया। बताया गया कि इसी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव था। 15 जनवरी 2020 को कमलेश पाठक कथित तौर पर इसी विवादित जमीन पर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल के पिता से कहासुनी हुई और विवाद बढ़ गया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के लोग मौके पर पहुंच गए। इसके बाद फायरिंग हुई, जिसमें मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की गोली लगने से मौत हो गई।

10 आरोपी दोषी

कोर्ट ने कमलेश पाठक के अलावा संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला और लवकुश सविता को भी दोषी माना है। मामले में गनर अवनीश प्रताप सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा जारी है। पुलिस कार्रवाई के बाद कमलेश पाठक और उनके परिवार से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियां भी जब्त की गई थीं।

राजनीतिक सफर भी रहा

कमलेश पाठक औरैया के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में रहे हैं। वह 1990 में विधान परिषद सदस्य बने थे और बाद में विधायक भी रहे। 2013 में समाजवादी पार्टी सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। 2015 में उन्हें सपा की ओर से MLC प्रत्याशी बनाया गया और वह विधान परिषद सदस्य चुने गए। अब डबल मर्डर केस में दोषी करार दिए जाने के बाद उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि एक बार फिर चर्चा में है।

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