Azamgarh child murder case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के चेवार पूरब गांव से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। 13 दिसंबर को जिस तीन वर्षीय मासूम अयान की मौत को महज एक हादसा मानकर दफना दिया गया था, वह वास्तव में प्रतिशोध की आग में की गई एक नृशंस हत्या थी। शुरुआत में लगा कि बच्चा छत से गिरकर भैंस के पैरों तले कुचल गया, लेकिन मां के अटूट विश्वास और पुलिस की जांच ने एक महीने बाद कब्र से सच को बाहर निकाल लिया। पड़ोस की युवती प्रिया ने स्वीकार किया है कि उसने अयान के पिता द्वारा की जा रही छेड़खानी का बदला लेने के लिए मासूम का ब्लेड से गला रेत दिया था। यह मामला अब सामाजिक विमर्श और कानूनी कार्रवाई का केंद्र बन गया है।

हादसे का रचा गया स्वांग
घटनाक्रम के अनुसार, 13 दिसंबर को अयान अपनी दादी के साथ छत पर खेल रहा था। जब दादी किसी काम से नीचे आईं, तभी अयान रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। काफी तलाश के बाद उसका लहूलुहान शव नीचे बंधी भैंस के पास मिला। ग्रामीणों और परिजनों ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना मान लिया और मासूम को गांगी नदी के तट पर दफना दिया गया। उस समय अयान के पिता गुलाबचंद घर पर मौजूद नहीं थे।
मां की ममता और संदेह की जीत
भले ही दुनिया ने इसे हादसा मान लिया था, लेकिन मां रिबिका को यकीन था कि कुछ गलत हुआ है। कुछ दिनों बाद घर के पीछे से अयान के खून से सने जूते बरामद हुए, जिससे उसका शक यकीन में बदल गया। रिबिका ने न्याय के लिए हार नहीं मानी और 5 जनवरी को Azamgarh जिलाधिकारी और Azamgarh एसएसपी से गुहार लगाई। आखिरकार, 14 जनवरी को प्रशासन की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया, जहाँ पोस्टमार्टम के जरिए हत्या की पुष्टि के साक्ष्य मिले।
प्रतिशोध की खौफनाक दास्तां
पुलिसिया जांच और मीडिया के सामने पड़ोस की युवती प्रिया ने अपना जुर्म कबूल कर सबको स्तब्ध कर दिया। प्रिया का आरोप है कि अयान का पिता गुलाबचंद उसके साथ अक्सर छेड़खानी करता था। उसने कई बार अपने परिवार को यह बात बताई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अपमान और गुस्से से भरी प्रिया ने मासूम अयान को निशाना बनाया। उसने ब्लेड से बच्चे का गला काटकर उसे छत से नीचे फेंक दिया ताकि यह एक दुर्घटना लगे।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल, Azamgarh पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के औपचारिक दस्तावेजों का इंतजार कर रही है ताकि युवती के इकबालिया बयान को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ जोड़ा जा सके। यह मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे बड़ों की गलतियों और आपसी रंजिश का खामियाजा बेगुनाह बच्चों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है।









