बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: यूजीसी कानून 2026 और बंधक बनाए जाने के आरोपों से मचा हड़कंप

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून 2026 के विरोध में इस्तीफा देकर सनसनी मचा दी है। उन्होंने डीएम पर बंधक बनाने का आरोप लगाया, जिसके बाद सरकार ने इस्तीफा नामंजूर कर उन्हें निलंबित कर शामली से संबद्ध कर दिया है।

Alankar Agnihotri

Alankar Agnihotri News: उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा पद से इस्तीफा देने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार के ‘यूजीसी कानून 2026’ (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम) के विरोध और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े मुद्दों को अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है। हालांकि, सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी पर उन्हें बंधक बनाने और मानसिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह पूरा प्रकरण अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

इस्तीफे के पीछे का मुख्य विवाद: यूजीसी कानून 2026

दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ‘समानता प्रकोष्ठ’ का गठन अनिवार्य है, जहाँ SC, ST और OBC वर्ग के लोग भेदभाव की शिकायत कर सकेंगे।

Image

हालांकि, सवर्ण वर्गों के संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि यह कानून असमानता को बढ़ावा देगा और इसका दुरुपयोग हो सकता है। अलंकार अग्निहोत्री ने इसी विरोध को स्वर देते हुए प्रशासनिक सेवा से हटने का निर्णय लिया, जिसे उन्होंने अपने समाज की आवाज उठाने का एक तरीका बताया।

बंधक बनाने के सनसनीखेज आरोप

सोमवार देर रात आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में Alankar Agnihotri ने चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बरेली के जिलाधिकारी (DM) ने उन्हें बातचीत के बहाने आवास पर बुलाया और करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा। अग्निहोत्री के अनुसार:

  • उन पर दबाव डाला गया कि वे इस्तीफे का कारण ‘काम का तनाव’ बताएं।

  • उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने का प्रलोभन दिया गया ताकि मामला दब सके।

  • सुरक्षा के खतरे को देखते हुए उन्होंने रात में ही अपना सरकारी आवास खाली कर दिया।

शासन की कार्रवाई और जांच

राज्य सरकार ने इस मामले को अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। बरेली के मंडलायुक्त (Commissioner) को इस पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। शासन का कहना है कि इस्तीफा देना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन जिस तरह से सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए गए हैं, उसकी गहन जांच जरूरी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अग्निहोत्री के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

Alankar Agnihotri ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल, बरेली में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। यह मामला अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने आरक्षण, जातिगत समानता और प्रशासनिक स्वतंत्रता जैसे बड़े सवालों को जन्म दे दिया है।

मुकदमेबाजी या मेल-मिलाप? राकेश टिकैत ने बताया क्यों खतरनाक है नया UGC कानून!
Exit mobile version