Bareilly Cow Death News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के विधानसभा क्षेत्र आंवला स्थित अनिरुद्धपुर गौशाला में गायों की मौत ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पिछले सप्ताह भूख और उचित चिकित्सा के अभाव में पांच गायों की तड़प-तड़प कर जान चली गई, जिसकी विचलित करने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। प्रारंभिक जांच में भारी लापरवाही की पुष्टि होने पर Bareilly जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन के निर्देशों का पालन न करने और बेजुबानों के प्रति उदासीनता बरतने के आरोप में ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच में खुली अव्यवस्था की पोल
घटना की गंभीरता को देखते हुए Bareilly जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह और एसडीएम विदुषी सिंह ने गौशाला का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच टीम की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि गौशाला के प्रबंधन में भारी चूक थी। गायों को समय पर न तो चारा उपलब्ध कराया गया और न ही बीमार गायों को उचित चिकित्सा सुविधा मिली।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मीडिया को बताया कि फोटोग्राफ्स और मौके की स्थिति से यह साफ जाहिर है कि स्थानीय Bareilly प्रबंधन ने अपने कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता बरती। ग्राम पंचायत सचिव शिप्रा सिंह को निलंबित कर दिया गया है, जबकि ग्राम प्रधान के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है।
उच्चाधिकारियों पर भी गिरी गाज
यह मामला सीधे तौर पर पशुधन मंत्री के क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण शासन स्तर पर भी सक्रियता बढ़ गई है। प्रशासन ने न केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय के तबादले और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के निलंबन के लिए शासन को आधिकारिक संस्तुति भेज दी गई है।
राजनीतिक गरमाहट और विपक्ष के तेवर
इस घटना ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का आरोप है कि गायों के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार के अपने मंत्री के क्षेत्र में पशु भूख से मर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इसके लिए केवल छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी और निगरानी तंत्र जिम्मेदार है। स्थानीय निवासियों का भी कहना है कि गौशालाओं के बजट और चारे की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर ऑडिट होना चाहिए ताकि ऐसी हृदयविदारक घटनाओं को रोका जा सके।
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