लखनऊ ऑनलाइन डेस्क। कहते हैं अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, लेकिन कानून से वह बच नहीं सकता। इस कहावत को चरितार्थ में कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के बरेली की पुलिस ने। यूपी के आईपीएस सुपरकॉप, एसएसपी अनुराग आर्य को जब एक कातिल के बारे में जानकारी हुई कि वह पिछले 36 सालों से फरार चल रहा है तो वह चकित हो गए। उन्होंने अफसरों की टीम गठित की। जाल बिछाया। जांबाज पुलिस के अफसरान पुलिस के साथ शातिर अपराधी को दबोच लिया। पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी पर मर्डर का केस दर्ज था। पुलिस से बचने के लिए आरोपी ने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि अपना धर्म तक बदल लिया और 36 साल तक पुलिस और अदालत से बचता रहा। उसने भेष बदल लिया। ठिकाना चेंज कर दिया। प्रदीप से अब्दुल गया और मुस्लिम युवती से शादी भी कर ली।
दरअसल, से पूरा मामला बरेली के थाना प्रेमनगर क्षेत्र का है। यहां के रहने वाला प्रदीप सक्सेना पर 1980 के दशक में दशक में धारा 302 और 379 का मुकदमा दर्ज हुआ था। कोर्ट और पुलिस से बचने के लिए आरोपी घर-परिवार छोड़कर गायब हो गया। इसी दौरान उसने अपने आपको पूरी तरह बदल लिया। पुलिस के मुताबिक, प्रदीप ने अपना नाम बदलकर अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर रख लिया। इतना ही नहीं, उसने मुस्लिम धर्म अपनाकर अपनी जिंदगी मुरादाबाद के मोहल्ला करूला में बसाई और वहीं ड्राइवरी का काम करने लगा। उसे यकीन था कि नई पहचान में वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा और उसकी जिंदगी ऐसे ही कटी रहेगी। आरोपी ने एक मुस्लिम युवती से शादी भी कर ली थी।
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को बरेली पुलिस को साफ निर्देश दिया था कि आरोपी को चार हफ्ते के भीतर गिरफ्तार करके सीजेएम बरेली की कोर्ट में पेश किया जाए। आदेश मिलते ही एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ नगर प्रथम आशुतोष शिवम की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले आरोपी के पैतृक कस्बे शाही में जांच शुरू की। लेकिन वहां के लोगों ने बताया कि प्रदीप करीब तीन दशक पहले ही घर छोड़कर चला गया था और उसके बाद से वह कभी दिखाई नहीं दिया। इससे पुलिस को अंदाजा लग गया कि वह कहीं नई पहचान के साथ रह रहा है। पुलिस ने हार नहीं मानी और अपनी जांच को और तेज कर दिया। पुलिस ने आरोपी के भाई सुरेश बाबू को हिरासत में लिया और पूछताछ की।
सुरेश और उसकी पत्नी ने पुलिस को बताया कि प्रदीप अब मुस्लिम धर्म अपना चुका है और मुरादाबाद के करूला इलाके में रहकर ड्राइवरी करता है। यह जानकारी पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुई। इस सुराग के आधार पर टीम बिना देर किए मुरादाबाद पहुंची और वहां की छानबीन में प्रदीप, उर्फ अब्दुल रहीम को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद स्वीकार भी किया कि वह नए नाम से रहकर पुलिस और अदालत से बचने की कोशिश कर रहा था। एसपी सिटी मानुष परिक ने बताया कि यह मामला पुलिस के लिए चुनौती जैसा था। इतने साल पुरानी फाइल, बदला हुआ नाम, बदला धर्म और दूसरी जगह पर नई जिंदगी इन सबके बावजूद भी पुलिस ने कड़ी मेहनत से आरोपी तक पहुंचने का रास्ता खोज निकाला।
एसपी सिटी मानुष परिक ने बताया कि आरोपी को अदालत के आदेश अनुसार सीजेएम बरेली की अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की जाएगी। जब थाना प्रेम नगर पुलिस ने प्रदीप को गिरफ्तार किया तो कई बातें सामने आईं। उसने अपनी पहचान छिपा ली, अपना हुलिया बदला और धर्म भी बदल लिया, जिससे पुलिस गिरफ्तार न कर सके। उसने अपना नाम अब्दुल हमीद रख लिया था, पता भी बदल दिया था। सोशल मीडिया पर जैसे ही बहरूपिए कातिल की खबर वायरल हुई तो लोग कमेंट करने लगे। एक यूजर्स ने लिखा कि आईपीएस अपुराग अनुराग आर्य की नजर से अपराधी भाग सकता है, लेकिन बच नहीं सकता। उन्होंने एकबार फिर साबित कर दिया कि पुलिस चाहे तो अपराधी को पाताल से भी खोज कर ला सकती है और यूपी पुलिस ने ऐसे कारनमे कईबार किए भी हैं।
अनुराग आर्य का जन्म 10 दिसंबर 1987 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली गांव में हुआ। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं। सामान्य बच्चों की तरह अनुराग का बचपन भी गांव में बीता, जहां उन्होंने लोकल स्कूल में पढ़ाई की। लेकिन इंग्लिश में वह काफी कमजोर थे। गांव के बच्चे शहरियों से पीछे महसूस करते थे। अनुराग ने इस कमजोरी को चुनौती माना। 2008 में वह देहरादून के इंडियन मिलिट्री अकादमी स्कूल पहुंचे। वहां माहौल नया था, लेकिन अनुराग ने हार नहीं मानी। अपनी इंग्लिश सुधारी और खेलों में धमाल मचाया। घुड़सवारी,राफ्टिंग और बाकी स्पोर्ट्स में अनुराग ने कई मेडल जीते। इस स्कूल से उन्होंने डिसिप्लिन और कॉन्फिडेंस सीखा। स्कूलिंग के बाद अनुराग बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां से उन्होंने बीएसपी पास किया।
2013 में अनुराग ने पहली बार यूपीएससी सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 163वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बन गए। उनकी ट्रेनिंग नेशनल पुलिस अकादमी हैदराबाद में हुई और अंडर ट्रेनिंग के लिए गाजियाबाद पोस्टिंग मिली। शुरुआती पोस्टिंग्स अमेठी, बलरामपुर,मऊ और प्रतापगढ़ में रहीं। अनुराग की तेजतर्रार स्टाइल से मुख्तार अंसारी गैंग की कमर टूट गई। आईपीएस की तैनाती कानपुर में भी रही। इस दौरान उन्होंने शहर से अपराध की कमर को तोड़ दिया था। फिलहाल .वह वर्तमान में बरेली के एसएसपी के पद पर हैं।








