Brij Bhushan 2029 Candidacy: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में उन्होंने घोषणा की है कि वह 2029 का लोकसभा चुनाव निश्चित रूप से लड़ेंगे, जिसके लिए उन्होंने अयोध्या (फैजाबाद) सीट की ओर संकेत किया है। हालांकि, इस दावे के साथ उन्होंने एक नया पेच फंसाते हुए कहा कि अयोध्या सीट पर पहला अधिकार भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार का है। बृजभूषण ने भावुक होते हुए यह भी स्वीकार किया कि 2023-24 के दौरान उनके खिलाफ एक गहरा षड्यंत्र रचा गया था, जिसके कारण उन्हें चुनावी मैदान से दूर रहना पड़ा। उन्होंने साफ किया कि पार्टी जहां से तय करेगी वह वहां से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सदन पहुंचना उनका अंतिम लक्ष्य है।
सियासी समीकरण और विनय कटियार का समर्थन
Brij Bhushan का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या की राजनीति में बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। उन्होंने विनय कटियार को ‘अयोध्या का हकदार’ बताकर न केवल एक पुराने साथी का सम्मान किया, बल्कि पार्टी के भीतर अपनी स्थिति को भी स्पष्ट किया। सिंह ने कहा, “अगर विनय कटियार चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो यह उनका अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”
षड्यंत्र का आरोप और 2029 की तैयारी
पूर्व सांसद Brij Bhushan ने अपने संबोधन में 2023-24 की घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे अपने खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया। ज्ञात हो कि कुश्ती महासंघ (WFI) विवाद के बाद उन्हें 2024 के चुनाव में टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज से मैदान में उतारा गया। अब बृजभूषण ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हार मानने वाले नहीं हैं और 2029 में किसी भी हाल में लोकसभा जाएंगे।
प्रमुख बिंदु:
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सीट का फैसला: पार्टी आलाकमान तय करेगा कि वे कहां से चुनाव लड़ेंगे।
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पुराने संबंध: उन्होंने पंकज चौधरी के साथ अपने 1991 के संबंधों को याद किया और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली की सराहना की।
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राष्ट्रकथा कार्यक्रम: सबको एकजुट करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम को उन्होंने अपनी ताकत बताया।
Brij Bhushan के इस रुख ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ वह अयोध्या की ओर देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कटियार की दावेदारी का समर्थन कर उन्होंने गेंद भाजपा नेतृत्व के पाले में डाल दी है।
