कैसरगंज का शेर फिर दहाड़ा: बृजभूषण ने खाई कसम, बोले- जिंदा रहा तो फिर संसद हिला दूंगा!

महिला पहलवानों के विवाद के बीच टिकट कटने से आहत बृजभूषण शरण सिंह ने 2029 में दोबारा सांसद बनने की कसम खाई है। अखिलेश यादव की तारीफ कर उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे भाजपा के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

Brijbhushan Sharan Singh

Brijbhushan Sharan Singh Return: कैसरगंज के पूर्व सांसद और दबंग नेता बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बगावती तेवरों और अखिलेश यादव की तारीफ के कारण उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने ऐलान किया कि यदि वे जीवित रहे, तो 2029 में दोबारा सांसद बनकर लोकसभा जरूर पहुंचेंगे। भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2024 में टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण को मैदान में उतारने के बाद, बृजभूषण ने अब अपनी राहें स्पष्ट कर दी हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता भाजपा ही है, लेकिन अपमान का घाव भरने के लिए वे निर्दलीय या किसी अन्य विकल्प से भी पीछे नहीं हटेंगे। अखिलेश यादव की तारीफ ने उनके भविष्य में समाजवादी पार्टी के साथ पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करने की अटकलों को हवा दे दी है।

Brijbhushan Sharan Singh का सियासी दांव: क्या फिर थामेंगे ‘साइकिल’?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह की छवि एक ऐसे नेता की है, जिनका दबदबा पार्टी के ठप्पे से कहीं बड़ा माना जाता है। देवीपाटन मंडल (गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती) में दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों और मजबूत जनाधार के दम पर वे दशकों से अजेय रहे हैं।

अखिलेश की तारीफ के सियासी मायने

एक ताजा पॉडकास्ट में Brijbhushan Sharan Singh ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ‘धार्मिक व्यक्ति’ और ‘श्रीकृष्ण का वंशज’ बताते हुए उनकी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:

“जब मैं अपने सबसे बुरे दौर (महिला पहलवानों के विवाद) से गुजर रहा था, तब अखिलेश यादव ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं कहा। मैं उनका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा।”

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि बृजभूषण 2008 में भाजपा से निकाले जाने के बाद सपा में शामिल हुए थे और 2009 का चुनाव कैसरगंज से सपा के टिकट पर ही जीता था। उनकी यह नरमी संकेत देती है कि अगर 2029 में भाजपा ने फिर से उन्हें नजरअंदाज किया, तो वे ‘पुराने घर’ की ओर देख सकते हैं।

भाजपा और बृजभूषण: सम्मान या संघर्ष?

बृजभूषण ने स्पष्ट किया है कि 2024 में टिकट कटना उनके लिए एक ‘अपमान’ था, जिसे वे जीत के जरिए ही धोना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे 2029 में चुनाव जरूर लड़ेंगे, चाहे भाजपा टिकट दे या न दे। उन्होंने कहा, “अगर भाजपा लड़ाएगी तो लड़ेंगे, नहीं तो पैदल (निर्दलीय) ही मैदान में उतरेंगे।”

दबदबे की बिसात

Brijbhushan Sharan Singh की ताकत उनके द्वारा स्थापित शिक्षा साम्राज्य और जमीनी पकड़ में निहित है। राम मंदिर आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले इस नेता ने समय-समय पर अपनी ही पार्टी की सरकार को घेरा है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा इस दिग्गज नेता को फिर से मुख्यधारा में जगह देती है या बृजभूषण अपनी कसम पूरी करने के लिए एक बार फिर भगवा छोड़ ‘साइकिल’ या निर्दलीय राह चुनते हैं।

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