UP Kshatriya Leader Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षत्रिय नेतृत्व को लेकर छिड़ी ताजा बहस के बीच भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का कड़ा बयान सामने आया है। दरअसल, सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में एक पोस्टर वायरल हुआ, जिसमें सवाल उठाया गया था कि क्षत्रियों का बड़ा नेता कौन—राजा भैया या बृजभूषण शरण सिंह? इस तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि (UP Kshatriya Leader) राजा भैया उम्र में उनके छोटे भाई की तरह हैं और उनके बेटों के मित्र हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को राजा भैया का इतिहास समझना है, तो उन्हें उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह के संघर्ष को देखना चाहिए। बृजभूषण ने उदय प्रताप सिंह को अपना आदर्श बताते हुए ऐसी तुलनात्मक बयानबाजी और पोस्टरबाजी को तुरंत बंद करने की चेतावनी दी है।
सोशल मीडिया पर क्षत्रिय समाज के बड़े नेता की रेस पर भड़के बृजभूषण शरण सिंह
कहा- ‘ऐसी बकवास बंद हो, राजा भैया और राजनाथ सिंह से तुलना समाज में विभाजन पैदा करती है। राजा भैया के पिता उदय सिंह संघर्ष के प्रतीक थे, वे हमारे आदर्श हैं। ऐसी तुलना अनुचित है।’
— अर्पित आलोक मिश्र (@arpitalokmishra) January 15, 2026
तुलनात्मक पोस्टर पर जताई कड़ी आपत्ति
कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ‘राष्ट्र कथा’ के समापन समारोह में बोल रहे थे। वहां मौजूद पत्रकारों ने जब उनसे क्षत्रिय समाज के नेतृत्व को लेकर वायरल हो रहे पोस्टर (UP Kshatriya Leader) पर सवाल किया, तो वे उखड़ गए। उन्होंने रामायण की चौपाई “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी” का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कथा समाज को जोड़ने के लिए थी, न कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए।
राजा उदय प्रताप सिंह को बताया अपना आदर्श
बृजभूषण शरण सिंह ने कुंडा के विधायक राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह) के साथ किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा से इनकार किया। उन्होंने कहा:
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संघर्ष का प्रतीक: “राजा भैया के पिता महराज उदय प्रताप सिंह संघर्ष के प्रतीक हैं। मैं उन्हें अपना आदर्श मानता हूँ।”
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पारिवारिक संबंध: “राजा भैया उम्र में मुझसे छोटे हैं और मेरे बेटों के दोस्त हैं। हमारे बीच नेता बनने की कोई होड़ नहीं है।”
जन्मदिन पर दिखा बृजभूषण का ‘दबदबा’
बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर गोंडा के नंदिनी निकेतन में भारी भीड़ जुटी। सरयू तट पर आयोजित इस कार्यक्रम में उनका पुराना ‘दबदबा’ साफ नजर आया।
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बुलडोजर से पुष्प वर्षा: उनके स्वागत के लिए समर्थकों ने कई बुलडोजर तैनात किए थे, जिनसे उन पर फूलों की बारिश की गई।
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सैकड़ों गाड़ियों का काफिला: समारोह के दौरान सैकड़ों गाड़ियों के साथ एक बड़ा जुलूस निकाला गया, जिसमें वे खुली जीप में सवार होकर जनता का अभिवादन स्वीकार करते दिखे।
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संतों का समागम: सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज द्वारा सुनाई गई राष्ट्र कथा के समापन पर बड़ी संख्या में संतों ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
राजनीतिक मायने
यूपी में हाल के दिनों में क्षत्रिय समाज की नाराजगी और UP Kshatriya Leader को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान न केवल राजा भैया के साथ उनके मधुर संबंधों को दर्शाता है, बल्कि समाज के भीतर किसी भी तरह के बिखराव की खबरों को खारिज करने की एक कोशिश भी माना जा रहा है।


