E office: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 अक्टूबर 2017 को प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की थी। इसका मकसद सरकारी कामकाज को पेपरलेस बनाना और फाइलों के निस्तारण में देरी को खत्म करना था।
ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय और सचिवालय के 93 विभागों को इससे जोड़ा गया। तय किया गया कि विभागों में फाइलों का निपटारा इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाएगा। हालांकि, कई साल बीतने के बाद भी लखनऊ समेत कई सरकारी विभाग इस व्यवस्था को गंभीरता से नहीं अपना रहे हैं।
ई-ऑफिस लॉग-इन नहीं करने पर सीएम नाराज
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक रिपोर्ट के जरिए जानकारी मिली कि 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस सिस्टम पर लॉग-इन ही नहीं हुए। यानी आधे से ज्यादा कर्मचारियों ने पूरे महीने डिजिटल सिस्टम पर कोई काम नहीं किया।
यह जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि जो अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस प्रणाली की अनदेखी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
44,994 कर्मचारियों का वेतन अटकने के आसार
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उनके प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा। इस पत्र में साफ कहा गया कि जिन 44,994 अधिकारियों और कर्मचारियों ने लंबे समय तक ई-ऑफिस लॉग-इन का इस्तेमाल नहीं किया है, अगर वे जनवरी महीने में भी ई-ऑफिस पर काम नहीं करते हैं, तो उनका वेतन रोक दिया जाए।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि ई-ऑफिस पर नियमित काम करने के बाद ही वेतन जारी किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर बिना काम के किसी कर्मचारी को वेतन दिया गया, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालयाध्यक्ष और आहरण-वितरण अधिकारी की होगी।
विभागों में मचा हड़कंप
इस पत्र के सामने आते ही सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों में अब ई-ऑफिस को लेकर गंभीरता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस सख्ती के बाद सरकारी दफ्तरों में डिजिटल कामकाज को नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाएगा।
किन विभागों का प्रदर्शन रहा कमजोर
रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार सुधार विभाग, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभाग ई-ऑफिस के इस्तेमाल में सबसे पीछे रहे। ऊर्जा विभाग के 75 यूजर्स में से एक भी यूजर ने पूरे महीने लॉग-इन नहीं किया। वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग में 10,895 यूजर्स में से 6,080 यूजर्स ने एक माह तक सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया।
सिंचाई, कृषि, राजस्व, ग्राम्य विकास, आवास, चिकित्सा, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभागों में भी हजारों कर्मचारियों ने ई-ऑफिस लॉग-इन नहीं किया। एनआईसी द्वारा तैयार यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी गई, जिसे देखकर उन्होंने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।
डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने की तैयारी
योगी सरकार का मानना है कि साल के अंत तक ई-ऑफिस प्रणाली को जिलों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर तक पूरी तरह प्रभावी बना दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस सख्ती से साफ है कि अब डिजिटल सिस्टम को हल्के में लेने वालों पर कार्रवाई तय है।







