Digital Arrest Scam:कासगंज, साइबर ठगों ने अब दहशत को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। जनपद कस्बा गंजडुंडवारा के मोहल्ला खेरू में रहने वाले 72 वर्षीय मोहम्मद स्वालेह अंसारी के लिए मार्च का वह हफ्ता किसी खौफनाक फिल्म से कम नहीं था। खुद को CBI और NIA का अफसर बताने वाले ठगों ने बुजुर्ग को उनके ही घर के एक कमरे में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया और टेरर फंडिंग का डर दिखाकर 31 लाख रुपये डकार लिए।
वर्दी का रौब और आतंकी संगठन का डर
ठगी का यह मायाजाल 12 मार्च को शुरू हुआ। एक अनजान कॉल आई और सामने से खुद को ‘डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड’ की अफसर बताने वाली प्रिया शर्मा ने स्वालेह अंसारी के होश उड़ा दिए। ठगों ने दावा किया कि मुंबई में उनके नाम से खुले खाते से आतंकी संगठनों को फंडिंग की जा रही है। सबूत के तौर पर उन्हें व्हाट्सएप सम्बंधित संगठन का पोस्टर भी भेजा गया। बुजुर्ग इस कदर सहम गए कि उन्होंने ठगों को ही अपना रक्षक मान लिया।
हर 2 घंटे में वीडियो कॉल पर हाजिरी
अपराधियों ने बुजुर्ग पर ऐसा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया कि उन्हें 7 दिनों तक कमरे में नजरबंद रहने पर मजबूर कर दिया। शर्त यह थी किसी को कुछ नहीं बताना है,और हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर रिपोर्ट देनी होगी। इसी दहशत के बीच ठगों ने बुजुर्ग से RTGS फॉर्म भरवाए और दो किश्तों में 31 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों ने झांसा दिया कि ‘RBI की क्लीन चिट’ मिलते ही पैसा वापस मिल जाएगा।
पैनी नजर ने बचा ली बडी रकम
ठगों की भूख यहीं शांत नहीं हुई। वे बुजुर्ग पर बैंक की एफडी तुड़वाने का दबाव बना रहे थे। इसी बीच घर की बच्ची ने दादाजी के मोबाइल पर आ रहे संदिग्ध मैसेज देख लिए और अन्य सदस्यो को बता दिया। परिजनों को माजरा समझते देर न लगी और उन्होंने अगली ट्रांजेक्शन रोक दी, जिससे लाखों रुपये और लुटने से बच गए।
पुलिस कभी फोन पर गिरफ्तार नहीं करती
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कासगंज ओम प्रकाश सिंह ने जनपद वासियों को आगाह किया है। उन्होने कहाँ साइबर सेल अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की कुंडली खंगाल रही है, जिनके जरिए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया। जनपदवासियो को जागरूक अपील के जरिए उन्होने अपील कर कहा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। अगर कोई आपको वीडियो कॉल पर डराए, तो वह ठग है। तुरंत 1930 डायल करें।

