Garhmukteshwar Viral: गढ़मुक्तेश्वर के शाहपुर चौधरी गांव में सोशल मीडिया पर की गई एक अनर्गल टिप्पणी ने दो समुदायों के बीच भारी तनाव पैदा कर दिया है। घटना की शुरुआत सोमवार को हुई, जिसने मंगलवार तक उग्र रूप धारण कर लिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि टिप्पणी के विवाद में न केवल युवक के साथ मारपीट की गई, बल्कि उसकी मां को भी घसीटकर अपमानजनक तरीके से पूरे गांव की सड़कों पर घुमाया गया। इस शर्मनाक घटना के बाद इलाके में सांप्रदायिक और जातीय तनाव व्याप्त हो गया, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पीड़ित की तहरीर पर दूसरे पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
घटना का क्रम और विवाद की जड़
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह सोशल मीडिया पर डाली गई एक जातिगत टिप्पणी थी। सोमवार को शुरू हुआ यह मनमुटाव मंगलवार को हिंसक झड़प में बदल गया। पीड़ित दीपक चौधरी ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में बताया कि 26 जनवरी को वह गांव के मंदिर में धार्मिक झंडा लगाकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान दलित समुदाय के कुछ युवकों ने उसे रास्ते में रोक लिया और जबरन अपनी बस्ती में ले गए।
वहां आरोपियों ने दीपक पर सोशल मीडिया के माध्यम से समाज विशेष के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट की। विवाद यहीं नहीं थमा, आरोप है कि हमलावरों ने उसकी मां को भी मौके पर बुला लिया और दोनों के साथ अमर्यादित व्यवहार करते हुए उन्हें गांव की गलियों में घुमाया।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही गढ़ कोतवाली पुलिस Garhmukteshwar सक्रिय हो गई। तनाव को देखते हुए पुलिस ने गढ़ चौपला और कोतवाली के आसपास जमा हुई भीड़ को तितर-बितर किया और शांति बनाए रखने की अपील की। इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों की बात सुनी गई है।
पीड़ित दीपक की शिकायत के आधार पर Garhmukteshwar पुलिस ने अनिल, अमित, सागर, विनीत और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। वहीं, दूसरे पक्ष ने भी दीपक के खिलाफ सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने की तहरीर दी है, जिसकी जांच की जा रही है।
सामाजिक प्रभाव
गांव में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन दबी हुई नाराजगी अभी भी बरकरार है। Garhmukteshwar पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वाले या सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के दुरुपयोग और उससे उत्पन्न होने वाले ग्रामीण विवादों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।
