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बेसिक शिक्षा विभाग ने लिया बड़ा फैसला, गाजीपुर में 423 सरकारी स्कूल होंगे बंद, जानिए वजह

Ghazipur

Gazipur government school closed: गाजीपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के 423 सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसला किया है, क्योंकि इनमें 50 से कम छात्र नामांकित हैं। प्रशासन ने इन स्कूलों की कम छात्र संख्या को देखते हुए आसपास के बड़े विद्यालयों में इनका विलय करने का निर्णय लिया है। जिले में 2,266 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें से करीब 20% स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। जुलाई में शिक्षकों को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन सुधार न होने पर अब यह कदम उठाया गया है। सबसे अधिक प्रभावित जमानिया ब्लॉक है, जहां 55 स्कूलों का अस्तित्व खतरे में है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

Gazipur में कुल 2,266 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 1,462 प्राथमिक, 350 उच्च प्राथमिक और 454 कंपोजिट स्कूल शामिल हैं। यहां लगभग 2.5 लाख छात्र पढ़ाई करते हैं। हालांकि, बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 423 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 50 से कम छात्र नामांकित हैं। विभाग ने कई प्रयास किए, जिनमें स्कूल चलो अभियान और अन्य योजनाएं शामिल थीं, लेकिन इन स्कूलों में छात्र संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई।

जुलाई में भी कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के शिक्षकों को नोटिस भेजे गए थे, ताकि वे बच्चों का दाखिला बढ़ाने की कोशिश करें। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ। इसके चलते अब इन स्कूलों का अस्तित्व संकट में है, और उन्हें नजदीकी बड़े स्कूलों में विलय किया जा रहा है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जमानिया

इस सूची में सबसे ज्यादा 55 स्कूल जमानिया ब्लॉक के हैं, जबकि सादात ब्लॉक में सबसे कम पांच स्कूलों को बंद किया जाएगा। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भांवरकोल (26 स्कूल), मोहम्मदाबाद (43 स्कूल), सैदपुर (31 स्कूल) और रेवतीपुर (25 स्कूल) शामिल हैं।

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प्रशासन की प्रतिक्रिया

Gazipur बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव का कहना है कि छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार अभियान चलाए गए, जिसमें खुद अधिकारी भी भाग ले चुके हैं। स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए, लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। राव ने बताया कि अब उन स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है, जिनमें 50 से कम छात्र हैं।

यह फैसला प्रशासन और विभाग की कड़ी नीति का हिस्सा है, ताकि शिक्षा प्रणाली को अधिक कुशल और प्रभावी बनाया जा सके।

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