Ghaziabad Development Charges: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रमुख शहरों में विकास शुल्क (Development Charges) की नई दरें लागू कर दी हैं, जिसका सबसे बड़ा झटका गाजियाबाद के निवासियों को लगा है। शासन द्वारा जारी नई सूची में गाजियाबाद को पूरे प्रदेश की सबसे महंगी श्रेणी में रखा गया है। नए नियमों के अनुसार, गाजियाबाद में अब नक्शा पास कराना और घर बनाना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा। विकास शुल्क में हुई इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी से न केवल आम आदमी का अपने घर का सपना प्रभावित होगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में फ्लैट्स की कीमतों में भी भारी उछाल आने की संभावना है। प्रशासन का तर्क है कि बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए यह वृद्धि आवश्यक थी।
प्रमुख शुल्क विवरण: गाजियाबाद सबसे ऊपर
उत्तर प्रदेश शासन ने विकास की स्थिति के आधार पर शहरों को अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया है। Ghaziabad में विकास शुल्क की दरें अब प्रदेश में सर्वाधिक हैं।
शहर/क्षेत्र |
पुराना शुल्क (प्रति वर्ग मीटर) |
नया शुल्क (प्रति वर्ग मीटर) |
गाजियाबाद शहर |
₹3208 |
₹4170 |
मोदीनगर / मुरादनगर |
₹2500 |
₹4170 |
लखनऊ, कानपुर, आगरा |
– |
₹2475 |
नोएडा, मेरठ, वाराणसी |
– |
₹1510 |
गोरखपुर, बुलंदशहर |
– |
₹1070 |
आम आदमी पर प्रभाव: 100 गज के प्लॉट पर ₹96,000 की चपत
यदि आप Ghaziabad में 100 वर्ग मीटर (लगभग 120 गज) के प्लॉट पर घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको नक्शा पास करवाते समय विकास शुल्क के रूप में ₹96,200 अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह वृद्धि सीधे तौर पर निर्माण लागत को बढ़ा देगी।
मोदीनगर और मुरादनगर में ‘वन नेशन-वन रेट’ का असर
पहले गाजियाबाद के मोदीनगर और मुरादनगर क्षेत्रों में विकास शुल्क कम (₹2500) था, लेकिन नई नीति के तहत अब पूरे जिले में एक समान दर लागू कर दी गई है। इसके चलते इन क्षेत्रों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक बढ़ोतरी से लोग आधिकारिक नक्शा पास कराने से बच सकते हैं, जिससे अवैध निर्माण की गतिविधियों में तेजी आने की आशंका है।
क्यों बढ़ाया गया शुल्क?
Ghaziabad विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के अनुसार, शहरों में बढ़ती आबादी के दबाव के कारण बुनियादी सुविधाओं जैसे:
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सड़कों का चौड़ीकरण
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आधुनिक सीवर लाइनें
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स्ट्रीट लाइट और पार्कों का रखरखाव
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नया इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
इन सभी कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति इस बढ़े हुए विकास शुल्क से की जाएगी।
प्रॉपर्टी बाजार पर दूरगामी परिणाम
केवल घर बनाने वाले ही नहीं, बल्कि फ्लैट खरीदने वालों पर भी इसका असर दिखेगा। बिल्डर्स पहले ही बढ़ती निर्माण सामग्री की कीमतों से परेशान हैं, अब विकास शुल्क में वृद्धि का बोझ भी अंततः ग्राहकों के कंधों पर ही डाला जाएगा। साथ ही, किराए के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए भी बुरी खबर है, क्योंकि मकान मालिक अपने निवेश पर मुनाफा बनाए रखने के लिए किराया बढ़ा सकते हैं।


