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Crocodile Attack: गोंडा में पानी में घात लगाए मगरमच्छ ने दबोचे दोनों पैर, भैंस की पूंछ बनी जिंदगी की डोर, बची जान

Gonda Crocodile Attack

 Gonda Crocodile Attack:उत्तर प्रदेश के गोंडा में बाढ़ के पानी में मगरमच्छ ने 35 वर्षीय लाली यादव पर हमला कर दिया। मगरमच्छ ने उनके दोनों पैर जबड़ों में दबोचकर गहरे पानी में खींचना शुरू कर दिया, लेकिन भैंस की पूंछ पकड़कर उन्होंने जान बचा ली। यह घटना तरबगंज तहसील के बाढ़ प्रभावित परास पट्टी मझवार के माझा गांव की है। लाली यादव का घर चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है और वह परिवार के साथ वहीं रह रहे हैं। शाम के समय वह भैंसों को लेकर पानी के बीच से घर लौट रहे थे। इसी दौरान बब्बन यादव के घर के पास पानी में छिपे मगरमच्छ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। मगरमच्छ ने उनके दोनों पैर अपने जबड़ों में दबोच लिए और उन्हें गहरे पानी की तरफ खींचने लगा।

पूंछ बनी सहारा

अचानक हुए हमले से लाली के सामने मौत का खतरा खड़ा हो गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने पास मौजूद अपनी भैंस की पूंछ पकड़ ली और जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाने लगे। लाली के मुताबिक मगरमच्छ लगातार उन्हें पानी में खींच रहा था। ऐसे वक्त में भैंस की पूंछ उनके लिए सहारे का काम करती रही। इसी वजह से वह पूरी तरह पानी में जाने से बच गए और लगातार मदद के लिए आवाज लगाते रहे।

ग्रामीणों ने बचाया

लाली की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत नाव लेकर मौके पर पहुंच गए। बगेहा, रामलव, बाबूलाल और बब्बन यादव समेत कई लोगों ने लाठी-डंडों से मगरमच्छ पर हमला करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के लगातार वार से मगरमच्छ ने लाली के पैरों को छोड़ दिया। इसके बाद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तरबगंज पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलने पर विधायक प्रेमनरायन पांडेय और एसडीएम प्रदीप सिंह भी अस्पताल पहुंचे और घायल लाली का हाल जाना।

हालत खतरे से बाहर

सीएचसी में डॉक्टरों ने लाली का इलाज शुरू किया। डॉक्टर निकेश सिंह ने बताया कि उनकी हालत अब खतरे से बाहर है। हालांकि मगरमच्छ के हमले से उनके दोनों पैरों में चोटें आई हैं। समय रहते ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, जिससे उनकी जान बच सकी। घटना के बाद गांव में लोग काफी डरे हुए हैं और बाढ़ के पानी में आने-जाने को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।

जलीय जीवों का खतरा

गोंडा के इस इलाके में बाढ़ के कारण खेत, रास्ते और आबादी वाले क्षेत्र पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे हालात में मगरमच्छ समेत दूसरे जलीय जीव भी आबादी के आसपास पहुंच सकते हैं। लाली पर हुए हमले ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि बाढ़ के पानी में रोजमर्रा के काम के लिए निकलना मजबूरी है, लेकिन अब हर कदम पर खतरा बना हुआ है। प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही सुरक्षित बनाई जाए और खतरनाक जलीय जीवों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

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