Gurmeet Ram Rahim Parole: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल मिल गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम को यह राहत रविवार को मिली, जिसके बाद वह जेल से बाहर आकर सिरसा स्थित अपने डेरे में समय बिताएगा। बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार मिलती इस कानूनी राहत ने एक बार फिर न्याय प्रणाली और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैरोल की अवधि के दौरान राम रहीम को कड़े नियमों का पालन करना होगा और उसका ठिकाना सिरसा डेरा ही रहेगा। सुनारिया जेल के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
बार-बार मिलती पैरोल: एक नज़र रिकॉर्ड पर
Gurmeet Ram Rahim को दी गई यह 40 दिन की पैरोल उसके जेल प्रवास के दौरान मिलने वाली 15वीं राहत है। इससे पहले उसे अगस्त 2025 में भी 40 दिनों की पैरोल मिली थी। जेल नियमों के अनुसार, एक कैदी को साल भर में अधिकतम 90 दिनों की पैरोल या फरलो मिल सकती है। आलोचकों का तर्क है कि राम रहीम के मामले में प्रशासन इन नियमों का लाभ देने में काफी उदार रहा है।
| पैरोल/फरलो का समय | अवधि | मुख्य कारण/ठिकाना |
| जनवरी 2026 | 40 दिन | सिरसा डेरा |
| अगस्त 2025 | 40 दिन | जन्मदिन/रक्षाबंधन |
| अप्रैल 2025 | 21 दिन | डेरा स्थापना माह |
| जनवरी 2025 | 20 दिन | शाह सतनाम जी की जयंती |
किन संगीन जुर्मों की काट रहा है सजा?
Gurmeet Ram Rahim को वर्ष 2017 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा:
पत्रकार हत्या कांड: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली हुई है।
रणजीत सिंह हत्या मामला: डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या में भी उसे दोषी ठहराया गया था (हालांकि कुछ मामलों में ऊपरी अदालतों से राहत या तकनीकी सुनवाई जारी है)।
विवाद और सुरक्षा प्रबंध
Gurmeet Ram Rahim की पैरोल हमेशा विवादों के घेरे में रहती है। पीड़ित परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव या विशेष अवसरों पर उसे राजनीतिक लाभ के लिए बाहर लाया जाता है। हालांकि, हरियाणा सरकार का पक्ष है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और राम रहीम का जेल में आचरण “अच्छा” रहा है।
सिरसा और रोहतक में पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है। राम रहीम को सख्त हिदायत दी गई है कि वह पैरोल के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक भाषण या भड़काऊ गतिविधियों में शामिल नहीं होगा।





