Harsha Richhariya Glamour Return: प्रयागराज माघ मेले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। महाकुंभ 2025 के दौरान ‘सुंदर साध्वी’ के रूप में प्रसिद्ध हुई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने आध्यात्मिक राह को त्यागने का बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि इस मौनी अमावस्या पर संगम में पवित्र स्नान करने के बाद वे अपने धार्मिक संकल्प को विराम देंगी और पुनः ग्लैमर की दुनिया में वापसी करेंगी। हर्षा ने भावुक होकर बताया कि पिछले एक साल में उन्हें भारी विरोध, आर्थिक तंगी और चरित्र हनन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई ‘माता सीता’ नहीं हैं जो बार-बार अग्नि परीक्षा दें, इसलिए अब वे अपने पुराने प्रोफेशन, एंकरिंग और ग्लैमर जगत की ओर लौट रही हैं।
"Harsha Richhariya will leave Hinduism."
"I'm not Sita and won't give Agni Pariksha."🔥
After facing continuous hate, abuse, trolling and character assassination by Hindus, she decided to step away from Hindu path.
Manuwadi can never tolerate a woman. pic.twitter.com/CddISH2As4
— Suraj Kumar Bauddh (@SurajKrBauddh) January 13, 2026
विरोध और कर्ज से परेशान होकर लिया फैसला
Harsha Richhariya ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर अपनी व्यथा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 से शुरू हुई उनकी आध्यात्मिक यात्रा अब खत्म हो रही है। हर्षा के अनुसार, धार्मिक राह पर चलने के दौरान उन्हें अपार मानसिक पीड़ा दी गई। उन पर धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों रुपये कमाने के आरोप लगे, जबकि सच्चाई यह है कि वे वर्तमान में कर्ज में डूबी हुई हैं। उन्होंने बताया कि ग्लैमर की दुनिया में वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र थीं और विदेशों में भी सफल एंकरिंग कर रही थीं, लेकिन धर्म की राह पर उन्हें केवल उधारी और विरोध ही मिला।
“मैं सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूं”
वीडियो में Harsha Richhariya का दर्द साफ छलका जब उन्होंने कहा, “मैं कोई मां सीता नहीं हूं, जो बार-बार अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा दूं।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी गलती के उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए और उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने समाज के एक वर्ग और कुछ धार्मिक संगठनों द्वारा किए गए निरंतर विरोध को अपने इस फैसले की मुख्य वजह बताया। हर्षा ने कहा कि अब वे वही काम करेंगी जिसमें न कोई विरोध था और न ही चरित्र हनन का भय।
युवाओं को दी परिवार के साथ रहने की सलाह
माघ मेले में अपने भाई के साथ स्नान करने पहुंची हर्षा ने युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे धर्म की बाहरी दुनिया में उलझने के बजाय अपने परिवार से जुड़े रहें। हर्षा ने कहा, “सबसे बड़ा धर्म अपने परिवार के साथ रहना और घर के मंदिर में पूजा करना है।” उनके अनुसार, बाहरी धार्मिक यात्राओं और संकल्पों से ज्यादा शांति अपनों के साथ रहने में है।
Harsha Richhariya का यह कदम सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ गया है। जहां कुछ लोग उनके फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे ग्लैमर और आध्यात्म के बीच के संघर्ष के रूप में देख रहे हैं। अब देखना होगा कि ग्लैमर की दुनिया में उनकी वापसी किस तरह की रहती है।




