Janani Suraksha Yojana: जननी सुरक्षा योजना ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित और अस्पताल में प्रसव को लेकर भरोसा बढ़ा है। इसका सीधा असर मातृ मृत्यु दर को कम करने और नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में देखने को मिल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से 20 दिसंबर 2025 तक लगभग 20 महीनों की अवधि में अमेठी जिले में कुल 44,305 सुरक्षित संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए। इनमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 25,307 प्रसव हुए, जबकि 1 अप्रैल 2025 से 20 दिसंबर 2025 के बीच 18,998 महिलाओं ने अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराया। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कुछ साल पहले तक जिले के कई ग्रामीण इलाकों में घर पर प्रसव की परंपरा आम थी।
डीबीटी से सीधे खाते में मिली मदद
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के बाद लाभार्थी महिलाओं को प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी, बल्कि महिलाओं को समय पर आर्थिक सहायता भी मिली। इस राशि से प्रसव के बाद देखभाल और जरूरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। योजना का मुख्य मकसद गर्भवती महिलाओं को सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करना है, ताकि प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को कम किया जा सके। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि अब महिलाएं पहले से ज्यादा नियमित रूप से प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण और नवजात शिशु की देखभाल सेवाओं का लाभ ले रही हैं।
आशा बहनों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप मातृ और शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है। अमेठी में इस दिशा में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने सराहनीय भूमिका निभाई है। आशा बहनों ने गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को योजना की जानकारी दी, समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए समझाया और जरूरी कागजी प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग किया।
इसके साथ ही जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी सुविधाओं को लगातार बेहतर किया गया, जिससे महिलाओं को इलाज और देखभाल में कोई परेशानी न हो।
95 प्रतिशत से अधिक संस्थागत प्रसव का लक्ष्य
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह के अनुसार, जननी सुरक्षा योजना अब केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रह गई है। यह मातृ मृत्यु दर को कम करने की एक मजबूत रणनीति बन चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में संस्थागत प्रसव की दर को 95 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि योजना के निरंतर और प्रभावी क्रियान्वयन से माताओं और नवजात शिशुओं का जीवन सुरक्षित हो रहा है। अमेठी जिला अब मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बेहतर उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
