Jhansi GST bribery case: झांसी के जीएसटी रिश्वतकांड में सीबीआई ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी की गिरफ्तारी के बाद अब साल 2022 से 2025 के बीच हुई सभी बड़ी छापेमारी की फाइलें फिर से खोली जा रही हैं। सीबीआई को शक है कि इस विभाग में रिश्वतखोरी का एक व्यवस्थित रैकेट काम कर रहा था, जिसमें कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।
झांसी में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अब इस भ्रष्टाचार की जड़ें खोजने में जुट गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह केवल एक बार का मामला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत व्यापारियों से वसूली की जा रही थी।
जांच के प्रमुख बिंदु:
पुरानी फाइलों की पड़ताल: सीबीआई वर्ष 2022 से 2025 के बीच लखनऊ, कानपुर और अन्य शहरों में सीजीएसटी द्वारा की गई बड़ी छापेमारी की फाइलों को खंगालेगी।
साक्ष्यों का विश्लेषण: Jhansi विभाग के कर्मचारियों के बयानों और छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर यह देखा जाएगा कि क्या पिछले मामलों में भी इसी तरह टैक्स कम करने के नाम पर डील की गई थी।
रैकेट का खुलासा: दावा किया जा रहा है कि Jhansi रिश्वतखोरी में केवल कुछ अफसर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों का एक पूरा ‘नेटवर्क’ सक्रिय था जो बिचौलियों के माध्यम से व्यापारियों पर दबाव बनाता था।
बरामदगी और कार्रवाई: सीबीआई ने अब तक इस मामले में करीब 1.60 करोड़ रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना-चांदी और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए हैं। प्रभा भंडारी को मास्टरमाइंड बताते हुए विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसा जा सकता है।










