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Kanpur में जमीन खरीदना होगा महंगा, सर्किल रेट में 25% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार

Kanpur

Kanpur circle rate hike: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में जमीन खरीदने वालों को जल्द ही बड़ी आर्थिक तैयारी करनी पड़ सकती है। प्रशासन ने शहर के विभिन्न जोनों में जमीन के सर्किल रेट में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह प्रस्ताव अब अंतिम सहमति और आपत्तियों की प्रक्रिया से गुजरेगा। जिलाधिकारी की मुहर के बाद यह नया रेट लागू हो जाएगा। खास बात यह है कि स्वरूप नगर और सिविल लाइंस जैसे प्रमुख मोहल्लों में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। एआईजी स्टांप के अनुसार, 1 अगस्त से बढ़ा हुआ सर्किल रेट लागू किया जा सकता है, जिससे रजिस्ट्री पर खर्च भी बढ़ेगा।

25 फीसदी बढ़ोतरी की तैयारी, प्रस्ताव अंतिम चरण में

Kanpur में सर्किल रेट में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के लिए प्रस्ताव लगभग तैयार हो चुका है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने विभिन्न मोहल्लों के मौजूदा रेट का आकलन कर नई दरें तय की हैं। अब यह प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। डीएम की सहमति के बाद प्रस्ताव पर आम लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों की समीक्षा के बाद कुछ इलाकों में प्रस्तावित रेट कम भी किए जा सकते हैं। अंतिम स्वीकृति के बाद रजिस्ट्री में नई दरें लागू हो जाएंगी।

स्वरूप नगर और सिविल लाइंस में सबसे ज्यादा असर

मौजूदा Kanpur सर्किल रेट की बात करें तो कानपुर के स्वरूप नगर में आवासीय जमीन की दर 62,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जो बढ़कर 77,500 रुपये हो सकती है। वहीं, व्यवसायिक इलाके सिविल लाइंस में वर्तमान दर 1,13,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जिसमें 25% वृद्धि के बाद यह 1,41,250 रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में जमीन खरीदने वालों को ज्यादा स्टांप शुल्क भी देना होगा। इस प्रस्ताव के लागू होने से शहर में रजिस्ट्री से होने वाली आय में बढ़ोतरी की संभावना है।

कब तक लागू होंगे नए रेट?

स्टांप विभाग के एआईजी श्याम सिंह बिसेन ने बताया कि प्रस्ताव अंतिम चरण में है और अगले 3-4 दिनों में इसे जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा। यदि कोई बड़ी आपत्ति नहीं आती है तो 1 अगस्त से नए सर्किल रेट लागू किए जा सकते हैं। जिन मोहल्लों में विरोध की संभावना ज्यादा होगी, वहां की दरों में संशोधन भी संभव है। यह पूरी प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी करने की तैयारी की जा रही है, ताकि शहर में जमीन की खरीद-फरोख्त को पारदर्शी और बाजार भाव के करीब लाया जा सके।

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