Kashi Naresh Bhadohi State University: भदोही के लिए 14 जनवरी का दिन ऐतिहासिक रहा, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘काशी नरेश विश्वविद्यालय’ की स्थापना से जुड़ा आधिकारिक अध्यादेश राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दिया। लंबे समय से एक उच्च शिक्षण संस्थान की बाट जोह रहे जनपद के लिए यह खबर किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। राज्यपाल की सहमति के बाद जारी इस अधिसूचना ने विश्वविद्यालय को कानूनी रूप से अस्तित्व में ला दिया है। अब भदोही के मेधावी युवाओं को उच्च शिक्षा, शोध और तकनीकी डिग्री के लिए प्रयागराज, वाराणसी या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा कर जिले की तस्वीर बदल देगा।
प्रशासनिक ढांचा और तत्काल संचालन
अध्यादेश के राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही विश्वविद्यालय की वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं। प्रमुख सचिव जे.पी. सिंह और विशेष सचिव रविंद्र कुमार के हस्ताक्षरों वाली इस अधिसूचना को मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्यपाल सचिवालय समेत सभी संबंधित विभागों को प्रेषित कर दिया गया है।
वर्तमान में, विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन के लिए एक अंतरिम व्यवस्था की गई है। जब तक काशी नरेश विश्वविद्यालय के अपने विशिष्ट नियम और अधिनियम तैयार नहीं हो जाते, तब तक इसके सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के नियमों के आधार पर संचालित किए जाएंगे। इससे प्रवेश प्रक्रिया और सत्र संचालन में किसी भी तरह की देरी की संभावना समाप्त हो गई है।
पलायन पर लगेगी रोक, शिक्षा का होगा विस्तार
भदोही को अब तक केवल उसके कालीन उद्योग के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह ‘एजुकेशन हब’ के रूप में उभरेगा। इस विश्वविद्यालय की स्थापना का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों के जीवन पर पड़ेगा:
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स्थानीय लाभ: भदोही के साथ-साथ मिर्जापुर, जौनपुर और प्रयागराज के सीमावर्ती गांवों के हजारों छात्रों को घर के पास ही स्नातक, परास्नातक और शोध (Ph.D) की सुविधा मिलेगी।
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आर्थिक बचत: बड़े शहरों में रहने और पढ़ाई करने का खर्च अब ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बोझ नहीं बनेगा।
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बेटियों की शिक्षा: घर के पास विश्वविद्यालय होने से छात्राओं के नामांकन में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर सुरक्षा या दूरी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी।
विकास का नया मील का पत्थर
शिक्षाविदों का मानना है कि यह संस्थान भदोही की बौद्धिक संपदा को निखारेगा। परिसर के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्तियां होंगी, जिससे रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। कुल मिलाकर, ‘काशी नरेश विश्वविद्यालय’ भदोही के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है।


