KGMU Lucknow Doctor Arrested: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पिछले दिनों डॉक्टर रमीज पर लगे गंभीर आरोपों के बाद, अब संस्थान के एक और इंटर्न डॉक्टर मो. आदिल को पुलिस ने नर्सिंग छात्रा के शारीरिक शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़िता का आरोप है कि डॉक्टर ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर और शादी का झांसा देकर अपने फ्लैट पर बुलाया और उसके साथ गलत काम किया। इतना ही नहीं, आरोपी ने छात्रा के अश्लील वीडियो भी बनाए और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। हालांकि यह शिकायत 29 दिसंबर को ही दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने में 15 दिन का समय लिया, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रेम जाल और शादी का झांसा
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार, पीड़ित छात्रा अलीगंज स्थित एक पीजी (PG) में रहती है। कुछ समय पहले उसकी मुलाकात केजीएमयू से एमबीबीएस इंटर्नशिप कर रहे मो. आदिल से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती बढ़ी और आरोपी ने उसे प्रेम संबंध में फंसा लिया। छात्रा का आरोप है कि आदिल उसे कैसरबाग स्थित आगा साहब की कोठी के पास बने अपने फ्लैट पर ले गया, जहाँ शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए।
धमकी और पुलिस की कार्रवाई
जब KGMU पीड़िता ने आरोपी डॉक्टर पर शादी का दबाव बनाना शुरू किया, तो उसने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया। आरोपी न सिर्फ वादे से मुकर गया, बल्कि छात्रा के साथ गाली-गलौज भी की। आरोप है कि डॉक्टर ने पहले ही छात्रा के कुछ अश्लील फोटो और वीडियो बना लिए थे, जिन्हें वह सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था।
परेशान होकर छात्रा ने 29 दिसंबर को कैसरबाग थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता का मजिस्ट्रेट के सामने बयान (164 CRPC) दर्ज करवाया, जिसमें छात्रा ने अपने आरोपों की पुष्टि की। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पुलिस ने गुरुवार को दबिश देकर आरोपी डॉक्टर को उसके फ्लैट से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
संस्थान की छवि पर गहराता संकट
गौरतलब है कि KGMU Lucknow पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सुर्खियों में है। इससे पहले डॉक्टर रमीज को रेप और धर्मांतरण की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। एक के बाद एक डॉक्टरों के ऐसे मामलों में संलिप्तता ने चिकित्सा जगत और विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था व नैतिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों और छात्रों में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर भी रोष है, क्योंकि एफआईआर के 15 दिन बाद गिरफ्तारी संभव हो पाई।


