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धर्मांतरण की ‘फैक्ट्री’ चला रहा था डॉक्टर रमीज: पिता ने भी पंजाबी महिला को फंसाकर किया था निकाह!

Dr Rameez

Dr Rameez Forced Conversion Syndicate: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज और उसके परिवार द्वारा संचालित एक सनसनीखेज धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि रमीज अपने पिता सलीमुद्दीन और पीलीभीत के काजी जाहिद हसन राना के साथ मिलकर एक सुनियोजित नेटवर्क चला रहा था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाना, उनका माइंडवाश करना और फिर धर्मांतरण कराना था। चौंकाने वाली बात यह है कि रमीज के पिता सलीमुद्दीन ने खुद 35 साल पहले एक पंजाबी महिला को फंसाकर दूसरा निकाह किया था। यह गिरोह न केवल महिलाओं का यौन शोषण करता था, बल्कि बंद कमरों में कट्टरता की तालीम देकर एक नया उग्रवादी समूह तैयार करने की कोशिश में जुटा था।

नफरत और कट्टरता का पारिवारिक इतिहास

पुलिस जांच के अनुसार, Dr Rameez के भीतर हिंदुओं के प्रति नफरत के बीज उसके पिता और काजी जाहिद ने बोए थे। सलीमुद्दीन, जो उत्तराखंड के खटीमा में होम्योपैथिक क्लिनिक चलाता था, वहां भी इलाज के बहाने हिंदू महिलाओं को बरगलाने का प्रयास करता था। रमीज को बचपन से ही सिखाया गया था कि हिंदू युवतियों को आर्थिक मदद और मीठी बातों के झांसे में लेकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाए। सलीमुद्दीन की दूसरी पत्नी खतीजा, जो मूल रूप से पंजाबी थी, इस बात का प्रमाण है कि यह सिलसिला दशकों से चल रहा था।

नशीले पदार्थ और अनैतिक गतिविधियां

Dr Rameez की जीवनशैली भी जांच के घेरे में है। वह न केवल दो महिला डॉक्टरों के यौन शोषण का आरोपी है, बल्कि उत्तेजना बढ़ाने के लिए ‘अमेरिकन गांजे’ का भी सेवन करता था, जिसे वह ऑनलाइन मंगवाता था। उसके हुसैनबाद स्थित फ्लैट पर कई महिलाओं का आना-जाना लगा रहता था, जहां वह उन्हें अपनी साजिशों का शिकार बनाता था।

देवबंद कनेक्शन और फंडिंग की जांच

यह गिरोह केवल पीलीभीत या लखनऊ तक सीमित नहीं था। आरोपी अक्सर सहारनपुर, देवबंद और बिजनौर जैसे इलाकों का दौरा करते थे, जहां वे गुप्त सभाएं आयोजित कर कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करते थे। वे कई कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में भी थे।

वर्तमान में चौक पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की सघन जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए विदेशों से फंडिंग मिल रही थी। पुलिस अब इन खातों के ट्रांजेक्शन के जरिए उन ‘सफेदपोश’ मददगारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की पहचान करने में जुटी है, जो इस धर्मांतरण गिरोह की रीढ़ बने हुए थे।

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