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संगम पर संग्राम! बिना नहाए लौटे शंकराचार्य, अखिलेश बोले- ‘क्या इसका दोष भी AI पर मढ़ेंगे?’

Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Magh Mela 2026: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज में उस समय तनाव व्याप्त हो गया, जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हुई। शंकराचार्य ने पुलिस पर अपने शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगाते हुए बिना शाही स्नान किए अपनी पालकी वापस लौटा दी। इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कृत्य को “अक्षम्य” करार देते हुए भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का “अहंकारी शासन” सनातनी परंपराओं में बार-बार विघ्न डाल रहा है, जिससे साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँच रही है।

Akhilesh Yadav का तीखा हमला: “क्या अब AI पर मढ़ेंगे दोष?”

समाजवादी पार्टी के मुखिया Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि माघ मेला क्षेत्र में साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार की पुनरावृत्ति हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी घटनाएं केवल भाजपा सरकार के दौरान ही क्यों होती हैं?

Akhilesh Yadav ने लिखा, “सदियों से चली आ रही शाही-स्नान की परंपरा में पिछले वर्ष भी इसी सरकार ने विघ्न डाला था। यह भाजपा के कुशासन और नाकाम व्यवस्था का परिणाम है। भाजपा शासन खुद से बड़ा किसी को नहीं मानता।” उन्होंने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब इस अव्यवस्था का दोष भी ‘एआई’ (Artificial Intelligence) पर मढ़ दिया जाएगा? उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

क्या था पूरा विवाद?

मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ पालकी और रथ पर सवार होकर संगम की ओर जा रहे थे। प्रशासन ने भीड़ के दबाव और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पालकी को आगे ले जाने से रोक दिया। शंकराचार्य का आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी और मारपीट की। अपमानित महसूस करते हुए स्वामी जी बीच रास्ते से ही वापस लौट गए और अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा और व्यवस्था की दुहाई

दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि करोड़ों की भीड़ के बीच सुरक्षा कारणों से किसी भी वाहन या पालकी को संगम नोज तक ले जाने की अनुमति नहीं थी। पुलिस कमिश्नर जोगिन्दर कुमार के अनुसार, शंकराचार्य से पैदल जाने का अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। प्रशासन का दावा है कि अनुयायियों ने बैरियर तोड़ा और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे करीब तीन घंटे तक मार्ग अवरुद्ध रहा। पूरी घटना सीसीटीवी में दर्ज है और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

संगम पर आस्था का जनसैलाब

विवादों के बीच, मौनी अमावस्या पर आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद दोपहर 12 बजे तक लगभग 3.15 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। भोर से ही संगम के सभी घाटों पर भक्तों की कतारें लगी रहीं, जिससे पूरा मेला क्षेत्र “हर-हर गंगे” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

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